दोस्त की बहन ने मुझे पटा कर चूत चुदाई करवाई

यह कहानी इसी साल मार्च की है. मैं एक घर में पेईंग गेस्ट की तरह से रहता था तो घर का मालिक मनीष मेरा दोस्त बन गया था क्योंकि हम दोनों हमउम्र थे.मनीष की शादी हो चुकी है उसकी एक बेटी है, जिसका नाम देवांशी है. देवांशी करीब 3 साल की है और अपनी नानी के घर ज्यादा रहती है. मनीष अनपढ़ है, इसी लिए कहीं जॉब नहीं कर पाता था. वो दिन भर ताश के पत्ते खेलता और दूसरों का कोई काम कर दिया करता था तो कुछ पैसे मिल जाते थे और वो उसी में खुश रहता था.

मनीष की बीवी का नाम रंजन है, जो 26 साल की है. पैसों की तंगी के वजह से रंजन नौकरी करती है. मनीष की एक बहन है, जिसका नाम गायत्री (बदला हुआ) है, मैं उनको गायत्री दीदी कह कर बुलाता था. उनकी एक बेटी थी, जिसकी 12 साल की उम्र में तबियत खराब रहने की वजह से मौत हो गई थी. दीदी की उम्र 36 साल है और उनका फिगर 34-32-36 का होगा. कुछ घरेलू वजहों से गायत्री दीदी के पति उन्हें छोड़ कर कहीं चले गए थे. गायत्री दीदी अपने घर में अकेली रहती थीं, कभी कभी अपने भाई के घर आ जाया करती थीं. अधिकतर जब उनके पास पैसे खत्म हो जाया करते थे, तब वे मनीष के घर आ जाया करती थीं. एक दिन गायत्री दीदी को पैसे चाहिए थे तो उन्होंने मनीष को फोन किया. मनीष ने फोन नहीं उठाया, तो वे करीब 3:30 बजे उसके घर पर आ गईं.

मैं अकेला बैठ कर लैपटॉप में बॉलीवुड की हीरोइनों की नंगी चुदाई की फोटो देख रहा था. तभी डोर बेल बजी, मैंने दरवाजा खोला तो मनीष की बहन गायत्री दीदी बाहर खड़ी थीं. आज तो गायत्री दीदी बड़ी कयामत लग रही थीं. दीदी मनीष को पूछने लगी, मैंने तुरंत मनीष को फोन किया तो उसने फोन नहीं उठाया. मैंने गायत्री दीदी को बैठने के लिए कहा. वो सोफे पर पसर कर बैठ गईं और कहने लगीं- ऐसे जीवन को क्या जीना, जिस जीवन में रंग ना हों. मैं उनकी बात सुनकर सोच में पड़ गया, फिर मैंने पूछा- क्या हुआ गायत्री दीदी? उन्होंने ‘कुछ नहीं..’ कह के बात को टाल दिया. फिर मैंने गायत्री दीदी को बोला- दीदी आप टीवी देखो, मैं आपके लिए चाय बनाके लाता हूं. जब मैं चाय बना कर लाया तो देखा कि गायत्री दीदी टीवी के बजाय मेरे लैपटॉप में जिस हीरोइनों की नंगी चुदाई वाली फोल्डर मिनीमाइस किया हुआ था, वो ओपन करके देख रही थीं. मुझे देखते ही उन्होंने चुदाई वाले फोल्डर मिनीमाइज कर दिया और कहने लगीं- बहुत बढ़िया लैपटॉप है.

पर तब तक तो मैं तो जान गया था कि गायत्री दीदी क्या देख रही थीं. उतने में टीवी पर रोमांटिक सीन आ गया. गायत्री दीदी ने कहा- वाह, कितना बढ़िया सीन है. मैंने चैनल बदल दिया तो गायत्री दीदी गुस्सा हो गईं और कहने लगीं- तुम अपने लैपटॉप में हीरोइनों की नंगी चुदाई वाली फोटो देखते हो तो कुछ नहीं. ये कहते हुए गायत्री दीदी ने लैपटॉप पे चुदाई वाले फोल्डर को मेरे सामने ही ओपन कर दिया. मैं गायत्री दीदी को ये सब करते देख हैरान रह गया. गायत्री दीदी ने मुझसे कहा- तुम यही देखते हो? मैंने गायत्री दीदी को सॉरी बोला और कहा- दीदी प्लीज़ किसी को मत बोलना नहीं तो बदनामी होगी. गायत्री दीदी ने कहा- एक शर्त पर किसी को नहीं बोलूँगी. मैंने कहा- क्या शर्त है?

दीदी ने बिना झिझक के बोल दिया- तुमको मुझे चोदना पड़ेगा. एक मस्त औरत के मुँह से चुदाई की बात सुनकर तो मैं सातवें आसमान पर उड़ने लगा और अगले ही पल मैंने गायत्री दीदी को अपनी बांहों में भर लिया. मेरी भी यही तमन्ना थी कि गायत्री दीदी को कैसे चोदूं. मैं गायत्री दीदी को चूमने लगा. मुझसे ज्यादा गायत्री दीदी मुझे चूमे जा रही थीं. मैं दीदी को चूमते चूमते एक हाथ से उनकी चूची को दबाने लगा. दीदी की चूची बहुत टाईट थीं. उनकी चूची को दबाने में बहुत मजा आ रहा था. मैंने दीदी को उठा कर पलंग पर ले गया. मैंने दीदी की साड़ी उतार दी. अब दीदी पेटीकोट और ब्लाउज में थीं, उनकी चूची मुझे ललचा रही थीं.

मैंने झट से दीदी के ब्लाउज को खोल के अलग कर दिया. दीदी अब ब्रा में और ज्यादा हसीन लग रही थीं. मैंने ब्रा के ऊपर से ही उनकी चूची को बहुत दबाया, मुझे बड़ा मजा आ रहा था. दीदी ‘उइ इइइ इ इस आह ह ओह आह उइइ..’ करने लगीं. क्या बताऊँ दोस्तो, उस टाईम मेरा क्या हाल हो गया था. तभी दीदी उठीं और उन्होंने जल्दी से मेरे शर्ट को खोल के अलग फेंक दिया और मुझसे चिपक गईं. मेरा लंबा लंड दीदी की चूत पर टकराने लगा. जल्दी से दीदी मेरी पैंट को खोलने लगीं. मैंने भी पैंट को खोलने में उनकी मदद की. पेंट खुलते ही मेरा 7 इंच का लंड चड्डी में उफान मारने लगा. मैंने दीदी के पेटीकोट जल्दी से खोल दिया. दीदी की लाल पैन्टी में उनकी चूत बहुत मस्त लग रही थी.

मेरा चड्डी को भी दीदी ने निकाल दिया. मेरे टनटनाते लंड देख कर दीदी ने कहा- इतना लंबा मोटा लंड… इससे तो मेरी चूत का बुरा हाल हो जाएगा. दीदी ने जल्दी से मेरे लंड को अपने मुँह में भर लिया और लपक के चूसने लगीं. बहुत देर तक लंड चूसने के बाद मेरा वीर्य दीदी के मुँह में झड़ गया. गायत्री दीदी ने देर न करते हुए सारा वीर्य गटक लिया और पी गईं. मेरा लंड सुस्त हो गया. मैंने दीदी की चड्डी निकाली. उनकी चूत पे हल्के हल्के बाल थे. वो बाल दीदी की चूत पे मस्त लग रहे थे. मैं उनकी चूत को चाटने लगा. दीदी के मुँह से ‘आह आह सीईईई सीई आओओओ इस्स हम्म चोओओओद चोद दो मुझे.. मेरी चूत को चोद दो.. बहुत दिनों की प्यासी है.. हुउउउ ईस ईस्स…’

बस दीदी झड़ गईं और उनका नमकीन सा पानी मैं गटक गया. थोड़ा बेकार सा लगा, लेकिन मजा आ गया. अब मैंने अपनी बनियान भी उतार दी और दीदी को पलंग पे लेटा कर उनसे चिपक गया. मेरा लंड उनकी चूत पे रगड़ रहा था. दीदी बोलीं- संजय अब जल्दी से चोद दे मुझे… बहुत दिनों से तड़प रही हूं. जैसे ही मैंने अपना लंड दीदी की चूत पे रखा, तभी मेरा फोन बज गया. मैंने कहा- अब कौन मर गया. मैंने सोचा किसी का फोन होगा तो नहीं उठाऊँगा, लेकिन देखा तो फोन मनीष का था. मेरी तो गांड फट गई कि कहीं आ तो नहीं गया. मैंने गायत्री दीदी को जल्दी से कपड़े पहनने को बोल दिया दीदी फटाफट कपड़े पहनने लगीं.

क्या बताऊँ दोस्तो, खड़े लंड पे अगर चूत सामने हो और कोई रूकावट हो जाए, तो कैसा महसूस होता है. मैंने फोन उठाया तो बोला- क्या रे, तूने फोन किया था? इतना सुनते ही थोड़ी जान में जान आई मैंने कहा- हां कहां मर गया था बे कमीने.. कब का फोन किया था. पत्ते खेलने में ज्यादा बिजी था क्या? मैंने कहा- दीदी घर पर आई हैं, उनको पैसे चाहिए. वो गुस्सा हो गया और बोला- जब देखो पैसे माँगती रहती हैं. उनको बोल कि मेरे पास पैसे नहीं हैं. उसकी बात सुनकर मैं चुप रहा तो वो फिर से बोला- उनको बोल दे, मुझे टाईम लगेगा, वो वहीं पे रूके.. अभी आकर उन्हें पैसे दे दूँगा. मैंने कहा- ठीक है.

हम दोनों अपने काम में लग गए. फटाफट से हम दोनों ने अपने कपड़े उतारे और दीदी मेरे लंड को चूसने लगीं. मुझे इतना मजा आ रहा था कि ब्यान नहीं कर सकता. फिर दीदी की चूत में मैंने जीभ डाल दी. दीदी तड़प उठीं और उन्होंने अपनी चूत को मेरे मुँह में दबा दिया. दीदी चुदासी सी होकर बोलने लगीं- संजय मेरी चूत को फाड़ दो.. इस चूत को इतना चोदो कि इसकी तमन्ना पूरी हो जाए. अब और मत तड़पाओ चोद दो मुझे चोद दो.. अब मैंने भी देर ना करते हुए अपना 7 इंच का लंड दीदी की चूत पर रख कर एक जोरदार धक्का दे मारा. दीदी की चीख निकल गई- उई मां मर गई आ आ इइइ इस्स.. मेरा 3 इंच लंड दीदी की चूत में चला गया था. दीदी बहुत टाइम से चुदी नहीं थीं.. तो उनकी चूत टाइट हो गई थी. मैंने एक और जोर का धक्का मारा. दीदी की फिर से चीख निकल गई. मेरा थोड़ा लंड बाहर रह गया था. दीदी की आंखों से आंसू बहने लगे.

मैंने दीदी से कहा- ज्यादा दर्द हो रहा है तो मैं निकाल लेता हूं. लेकिन दीदी कहने लगीं- ये खुशी के आंसू हैं. बहुत दिनों के बाद चुदी हूँ, मुझे जोर जोर से चोदो.. आज इस साली चूत को शांत कर दो.. फाड़ दो मेरी चूत को.. मैं जोर जोर से गायत्री दीदी को चोदने लगा. दीदी आहें भरने लगी- आंह अंह अंह अअअम उम्म्ह… अहह… हय… याह… अअअअ चोओओदो मेरी चूत को.. चोद दो चोद दो.. फाड़ दो इस चूत को इतना चोदो कि साली शांत हो जाए.. आह उइइ इइइइइ आई ओओओओ चोदो. मेरा लंड दीदी की चूत की गहराइयों में खो गया था. दीदी के गर्भाशय से जब भी मेरा लंड टकराता, तो दीदी मुझे कस के अपनी बांहों में जकड़ लेतीं. ऐसा लगता कि दीदी की बांहों में मेरा दम निकल जाएगा.

दीदी अभी तक दो बार झड़ चुकी थीं. लेकिन अभी मेरा झड़ने वाला नहीं था. दीदी को मैं बहुत जोर जोर से चोदे जा रहा था. दीदी मजे से अपनी चूत चुदवा रही थीं. दीदी ने कहा- आह.. जिन्दगी में ऐसी चुदाई कभी नहीं हुई. मैं गायत्री दीदी को जोर जोर से चोदे जा रहा था. अब मैं भी झड़ने वाला था. गायत्री दीदी की चूत ने फिर पानी छोड़ दिया. उतने में मैंने गायत्री दीदी को बोला- मैं भी झड़ने वाला हूं. गायत्री दीदी ने कहा- मेरी चूत में अपना माल छोड़ दो. मैंने कहा- कहीं बच्चा ठहर गया तो? दीदी बोलीं- तो क्या हुआ मेरे बच्चे के बाप बन जाओगे. मैंने कहा- फिर मैं बाहर निकाल देता हूं. गायत्री दीदी ने कहा- मैं मजाक कर रही हूं.. मेरा ऑपरेशन हुआ है. मैं मां नहीं बन सकती.

फिर दस पन्द्रह धक्के मारने के बाद मेरे वीर्य की पिचकारी गायत्री दीदी की चूत में भर गई. तभी दरवाजे की डोर बेल बजी. हम दोनों को तो जैसे सांप सूंघ गया. मैं जल्दी से गायत्री दीदी से अलग हुआ और गायत्री दीदी को बोला- अपने सारे कपड़े लेकर बाथरूम में जल्दी जाओ. गायत्री दीदी अपने सारे कपड़े लेकर बाथरूम में भाग गईं, लेकिन गायत्री दीदी की चूत से मेरा वीर्य बिस्तर से लेकर बाथरूम तक फर्श पर टपकता गया. मेरे वीर्य के निशान फर्श पर साफ दिख रहे थे. मैंने ध्यान नहीं दिया, मैंने भी जल्दी जल्दी अपने कपड़े पहन के दरवाजा खोला तो मालूम हुआ कि कोई शरारत से या गलती से डोरबेल को बजा गया था. जब वापस आया तो गायत्री दीदी को बुलाया. गायत्री दीदी बाहर आईं तो फर्श पर पड़े वीर्य को देख कर चौंक गईं.

दीदी कहने लगीं- संजय इतना सारा तुमने मेरी चूत में अपना माल छोड़ दिया था? उसके बाद गायत्री दीदी ने फर्श पर पड़े वीर्य को साफ किया. उतने में मनीष का फोन आया, उसने बोला- नीचे आ जाओ, मैं भी आने वाला हूँ. फिर गायत्री दीदी को मैंने एक किस किया. गायत्री दीदी ने कहा- मजा आ गया.. संजय तेरे लंड ने मेरी चूत को सही में शांत कर दिया. थोड़ी देर में हम दोनों नीचे आ गए. गायत्री दीदी को मनीष ने पैसे दिए और अपनी बीवी को लेने चला गया. गायत्री दीदी भी चली गईं. लेकिन अब हम दोनों को जब भी चुदाई का मन करता है तो हम खूब चुदाई का मजा लेते हैं. मैंने बहुत बार चुदाई की. गायत्री दीदी अब मेरे लंड से बहुत खुश हैं.

Author: Chudaiporn

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