देसी भाभी ने की मेरे साथ लॉन्ग ड्राइव और राइड

नमस्कार दोस्तों Chudaistory.org पर आप का स्वागत है। मैं प्रतापपुर (छत्तीसगढ़) में नया – नया रहने आया हूँ. में एक प्राइवेट कम्पनी में काम करता हूँ।. मेरा नाम शंकर है. अब मैं कहानी पर आता हु. ये बात उस समय की है, जब मैं प्रतापपुर से अंबिकापुर जा रहा था. उस समय त्योहारों का समय था, तो मुझे टिकेट नहीं मिला और जब मैं टिकेट काउंटर पर गया और मैंने मेनेजर से प्रार्थना की, कि मेरा अंबिकापुर जाना बहुत जरुरी है और जब मैंने उसे दोगुना पैसा देने का लालच दिया तो, तो उसने मुझे एक सीट दे दी. में जब बस के अंदर गुसा तो मुझे तुरंत खली सीट मिल गई और में थका होने की वजह से जैसे सीट पर बीटा तो मुझे नींद लग गई।

और लग-भग आधे घंटे बाद किसी ने मुझे उठाया दोस्तों आप यकीं नहीं मानोगे जैसे मेने अपनी आखे खोली तो मेरे सामने मानो एक जन्नत की परी खड़ी हो क्या बला की खूबसूरत थी वो। वह बहुत की सेक्सी थी बिलकुल सनी लियॉन जैसी अब वो मेरे बराबर वाली सीट पे बेट गई और फिर थोड़ी देर बाद उसने मुझसे पूछा की बस खाने के लिए कहा रुकेगी तो मेने कहा की में भी पहली बार जा रहा हु मुझे भी नहीं मालूम फिर हम दोनों ने अपने आप को एक दूसरे के बारे में बताया। उसने बताया की वो प्रतापपुर में रहती है और उसकी शादी को 5 साल हो गए है उसका नाम संध्या था उसका पति अम्बिका पुर में काम करता है। जब बस खाना खाने के लिए होटल पे रुकी तो संध्या ने कहा की चलो खाना खाते है तो मेने कहा की में घर से खाना खा के आया हूँ आप खाना खा लो।

और फिर संध्या खाना खा के वापिस सीट पे आकर बेट गई संध्या साथ में आलू चिप्स लेकर आई थी। उसने मुझे कहा की प्लीज ये तो खाना ही पड़ेगा उसने रिक्वेस्ट की तो में अपने आप को रोक नहीं पाया और फिर हम दोनों चिप्स खाने लगे। थोड़ी देर बाद हम दोनों सो गई और मुझे पता ही नहीं चला की कब मेरा हाथ संध्या की जांग (पैर) पर था जैसे ही मेरी आँख खुली तो मेने देखा की संध्या धीरे धीरे मेरे हाथ को दबा रही थी। मेने तुरंत अपने हाथ को खींचा और संध्या से माफ़ी मांगी की मुझे मालूम नहीं सॉरी। हम लोग फिर से सो गए थोड़ी देर बाद मुझे महसूस हुआ की संध्या मेरे कंधे पर सर रक् के सोइ हुयी है लेकिन मेने संध्या का सर अपने कंधे से नहीं हटाया और न ही कोई हल चल की। जब हम उठे और संध्या ने देखा, तो संध्या ने मुझे सॉरी बोला. मैंने कहा – इट्स ओके. उसके बाद, संध्या ने मुझसे पूछा, कि मैं कहाँ रहता हु. मैंने कहा – चोरये के स्टूडियो के पास मेरा घर है

फिर मैंने संध्या से पूछा, तो संध्या ने बताया, कि वो महामाया रोड हाउस नंबर 498 में रहती है. फिर हमने अपनी काम काज के बारे में बाते कि. वो भी एक प्राइवेट कंपनी में काम करती थी. बस रुकने पर और अपने  स्टॉप पर जाने से पहले, हमने एक दूजे के नंबर लेलिए. एकदिन, संध्या ने मुझे एसएमस किया. संध्या – हेलो…  मैं – हाई… संध्या – हाउ आर यू?  मैं – गुड, अबाउट यू… फिर हम लोगो में कुछ इधर – उधर की बाते होती रही और संध्या ने मुझसे आने वाले हफ्ते का कार्यक्रम पूछा. मैंने कहा – कुछ नहीं. बस दोस्तों के साथ हफ्ते पार्टी का कार्यक्रम है. मैंने संध्या को पूछा – क्यों? संध्या ने कहा – कुछ नहीं. बस सोचा, अगर तुम्हारा कोई कार्यक्रम नहीं है. तो कहीं मिलते है. मैंने कहा – कोई बात नहीं. दोस्तों के साथ कार्यक्रम कुछ खास नहीं है. हम मिलते है. फिर मैंने संध्या को जगह का नाम बताया और कहा – मैं तुमको वहांसे ले लूँगा. मैंने संध्या को पिक्चर के लिए पूछा. तो संध्या ने मना कर दिया. फिर हमने साथ कहीं बाहर जाने का कार्यक्रम बनाया.

मेने संध्या को पिक किया और हम लॉन्ग ड्राइव पर निकल गए थोड़ी दूर जाने के बाद हम को पुलिस ने रोका और पूछा की कहा से आरहे हो तो हमने कहा की प्रतापनगर से फिर पुलिस ने मुझे कहा की ये औरत कौन है तो में काफी टेंशन में आगया लेकिन 10 सेकंड में संध्या ने कह दिया की में संध्या का पति हु और फिर पुलिस वाले ने हमको जाने दिया। दोस्तों जैसे उसने मुझे पति कहा मेरा तो पूरा सरीर काम करना ही बंद कर दिया क्यों की वो इतनी खूबसूरत थी।  की अगर में उसका बॉय फ्रेंड बनु तो भी मेरे लिए बड़ी बात थी फिर हम दोंनो ने खूब मज़े किये अब हम दोनों अच्छे फ्रेंड बनने लगे थे। हम लोग रोज़ फ़ोन पर बाते करते थे और हफ्ते में कही न कही गुमने जाया करते थे।

दोस्तों एक दिन की बात है उसने मुझे अपने घर बुलाया लेकिन मेने कहा की इसकी क्या जरुरत है तो संध्या ने कहा की में घर पे अकेली हु टेंशन की कोई बात नहीं हम तो अच्छे फ्रेंड है फिर में तैयार हो कर संध्या के घर गया। दोस्तों शायद आग उसे मुझ से चुदना था  में उसके घर पंहुचा तो डोरबेल बजाई तो संध्या ने दरवाज़ा खोला दोस्तों में तो संध्या देखता ही रह गया। उसने हरे कलर की ट्रांसप्रेंट साड़ी पहनी हुई थी फिर संध्या ने मुझे अंदर आने को कहा में अंदर गया और बैठक रूम में जा के बैठ गया। मेरे दिमाग में अभी भी कुछ गलत नहीं था उसके लिए।  तो संध्या ने कहा की मुझे 45 मिनट लगेगा में खाना बना देती हु तो मेने कहा ठीक है जी और मुझे थकन महसूस हो रही थी इस लिए में उसके बैडरूम में जा के सो गया। थोड़ी देर बाद संध्या ने मुझे आवाज़ लगाई लेकिन में गहरी नींद में था इस लिए सुन नहीं पाया और वो मुझे ढूंढते हुए बैडरूम में आई और मुझसे पूछा की किया हुआ तो मेने कहा की थोड़ी थकन थी इस लिए नींद आगई। संध्या ने कहा कोई नहीं जी चलो खाना खा लेते है संध्या के बाद आप के लिए कुछ गिफ्ट है मेरे पास।

फिर हम दोनों ने साथ में खाना खाया और फिर मेने पूछा की बताओ क्या गिफ्ट है मेरे लिए तो संध्या ने कहा की आज उसकी शादी की सलगिरा है तो मेने कहा पागल पहले क्यों नहीं कहा में कुछ गिफ्ट लेके आता और फिर मेने कहा की अब में चलता हु तुम्हारे पति आनेवाले होंगे तो उसने कहा वो नहीं आएंगे उनको कुछ काम है इस लिए और फिर संध्या ने कहा की आज का पूरा दिन में तुम्हारे साथ बिताना चाहती हु। फिर हम आपस में बाटे करने लगे जिसमे सेक्सी बाते  होने लगी और उसने मुझे कहा की में अपने पति से खुस नहीं हु क्यों की में जब वह जाती हु तब सेक्स कर पति हु या वो यहाँ आते है तब सेक्स कर पाते है इसलिय प्लीज आज तुम मुझे पुरे दिन चुदाई करो यहाँ तक की उसने तो वियाग्रा की टेबलेट भी लाके राखी थी।  मेरे लिए फिर संध्या मुझे हाथ पकड़ के दूसरे कमरे में लेके गई और मेरे लिए दूध का गिलास फार के लेके आई और उस गिलास में 1 गोली की जगह उसने 2 गोली मिला दी और मुझे ज़बरदस्ती पीला दिया।

और फिर संध्या ने मुझे कहा की आज के लिए आप मेरे हस्बैंड हो और मुझे बेड पर धकेल दिया और कहा  आई लव यू मेरी जान। संध्या ने मेरे होठो पर अपने होठ रख दिए और लिप लॉक कर दिया. मेरे अपने आप से कण्ट्रोल छुट गया और मैंने भी संध्या का चेहरा पकड़ा और उसको बहुत जोर से किस करने लगा. हम दोनों एक दुसरे में खोये हुए, एक दुसरे को किस कर रहे थे और फिर अचानक से संध्या ने मेरे कपड़े खोल दिए और अपने कपड़े भी उतार दिए. अब मैं सिर्फ अंडरवियर में था और वो ब्रा और पेंटी में. संध्या के बूब्स को देख कर मेरी आँखे फटी की फटी रह गयी. मेरे मुह से एकदम निकला – वाओ.. और मैंने अपने हाथ उसके बूब्स पर रख दिए और मस्ती में मसलने लगा. फिर, मैंने अपना मुह उसके निप्पल पर लगा दिया. संध्या के मुह से अब सिस्कारिया निकलने लगी थी आआआआआ आआअह्हह्हह्ह …

वो बहुत बैचेन हो गयी और बोली रही थी. अब मुझे चोदो प्लीज.. उसने मेरे अंडरवियर को उतार दिया और मेरा लंड बाहर निकाल लिया. संध्या एकदम से चौक गयी, मेरे 7 इंच के लंड को देख कर और संध्या की आँखों में चमक भी आ गयी. संध्या ने मेरे लंड को अपने मुह में रख लिया और चूसने लगी. मुझे नहीं मालूम था, कि वो इतनी मस्त ब्लोजॉब देती है. फिर संध्या ने धक्का मारा और मेरे ऊपर चढ़ गयी. संध्या ने अपने हाथ से मेरे लंड को अपनी चूत पर टिकाया और धम्म से मेरे ऊपर बैठ गयी और मेरे ऊपर उछलने लगी. मेरे लंड में दर्द हो रहा था, लेकिन मज़ा भी आ रहा था. उसने मुझे करीब 45 मिनट तक राइड किया और फिर मैंने अपना पानी छोड़ दिया. फिर संध्या मेरे लंड से उठकर मेरे मुह पर आ गयी और मैं मस्त संध्या की चूत को चाटा और संध्या ने अपना पानी मेरे मुह पर छोड़ दिया.

उसके बाद हम दोनों कुछ देर ऐसे ही लेटे रहे. कुछ देर बाद, संध्या ने कहा – मैं डिनर बना लेती हु. जब संध्या किचन में डिनर बना रही थी. मैं उसके पीछे गया और संध्या की बेक पर किस करने लगा. उसने कहा – प्लीज रात को. अभी काम करने दो. मैं संध्या की बात मान कर रूम में वापस आ गया. फिर जब संध्या रूम में आई, तो मैंने एक भी मिनट वेस्ट नहीं किया और संध्या को मस्त चोदा. फिर हम साथ में सो गये. जब हम सुबह उठे, तो हमने एक बार फिर से चुदाई की और फिर मैं ब्रेकफास्ट करके घर वापस आ गया. उसके बाद, हमने कई बार और सेक्स किया. कुछ महीनो बाद, संध्या भी एक नई जॉब अम्बिकापुर में मिल गयी और संध्या अपने पति के साथ शिफ्ट हो गयी. मैं आज भी संध्या को मिस करता हु..

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