गांव की सुखी नहर में चुदाई का कहर

हेलो दोस्तों भारत की लड़की किसे पसंद नहीं आती, उसकी अदाएं शरमाना और गाँड़ हिलाना और फिर लंड चूसते समय अपनी आंखों को बंद करके ऐसे चूसना जैसे कि परम सुख मिल रहा हो। यही तो विशिष्टता है एक भारत की लड़की की। तो दोस्तों नैना नाम की मेरी एक दोस्त के चुदने की कथा सुनाना चाहूंगा। वो गजब की माल है। एक दम गोरा जिस्म, ऐसा जैसे की मखमल का हो। नुकीली नाक, लंबी गरदन, किसी परी की तरह खूबसूरत चेहरा और फिर उसकी रंगत में उसकी अदाएं शामिल होकर उसे और भी हसीन बना देती हैं। उसके साथ मेरा अफेयर पिछले 8 महीने से चल रहा था पर उसको चोदने का टाइम नहीं मिल पा रहा था। मैं बस इंतजार में था कि टाइम मिले और उसको चोदने का यह गोल्डन चांस मैं सपने में भी न गवाऊं। इस लिए मैं अक्सर उसके साथ रहता था। एक बार हम गांव ट्रिप पर गये थे एक सर्वेक्षण करने और इस लिए हम दोनों को साथ ही सर्वेक्षण करना था।

उस दिन में और नैना सर्वे करके एक गांव के कालेज से पैदल ही आ रहे थे। गर्मियों की दुपहरी थी और माहौल शांत था। दोनों एक दूसरे से बात करते हुए आ रहे थे कि नैना को प्यास लग गयी, दूर दूर तक कोई पानी न था। हम दोनों आराम करने के लिए पास ही एक नाले की छांव में बैठ गये। मैने देखा नाला पूरा साफ था और अंदर से खाली था। गर्मियों में नाले में पानी कहा होगा । मैने नैना को अंदर बुला लिया और चुम्मा चाटी करने लगा। उसको प्यास लगी थी पर प्यास कहां से बुझे। मेरे दिमाग में एक उपाय आया। मैने नैना को अपना लंड चुसाने के बारे में सोचा। धीरे से उसकी चूंचिओं को दाबते हुए मैने नैना की स्कर्ट में हाथ डाल दिया। नैना की पैंटी सरका कर मैने नैना की चूत में उंगली डाल दी। नैना एकदम सिस्कारियां मारने लगी और फिर आह्ह उह्ह करने लगी। मैने नैना को नीचे बिठा दिया। अपनी जिप खोल कर मैने उसके मुह में अपना लंड दिया। नैना एक बार लैब में मेरा चूस चुकी थी और इसलिए मैने नैना को पीने के लिए दे दिया अपना लौड़ा। वो अंदर बाह्र कर रही थी कि मेरे दिमाग में खुराफात सूझी।

मैने कहा कि नैना पानी पीने लिए तैयार हो जाओ। नैना इससे पहले कि कुछ समझ पाती, मैने उसके मुह में मूत दिया। गटागट तीन चार घूंट पेशाब जब नैना के मुह के अंदर गया तो वह खुश हो गयी। कहने लगी, वैसे इसका टेस्ट तो बीयर के समान है। पिला दो मुझे। और फिर मैने सारा पेशाब उसके हलक में उतार दिया। अब पेशाब कर लेने के बाद मेरे लंड की अकड़न और बढ गयी थी। उसका वीर्य एकदम उफान मार रहा था और मैने उस सेक्सी नैना की टाप उतार दी। अब नैना नंगी मेरे सामने खड़ी थी। मैने नैना के सीने को दबाते हुए अपने शर्ट की बटन खोल दी और फिर जोर जोर से नैना को अपने सीने से रगड़ने लगा। दोनों के सीने से होती रगड़ से जैसे वासना की चिंगारियां सेक्स के आग को और भी बढा रहीं थीं और फिर हम दोनों ने सारी सीमाएं लांघ दीं

मैने नैना को अपने हाथों से जमीन पर झुकाया, स्कर्ट को उपर उठाया और फिर चूत में अपना लंड रगड़ने लगा। अंदर बाहर अंदर बाहर करने लगा। नैना आह्ह!! मार डाला, आह्ह दर्द कर रहा है। शायद नैना की चूत की झिल्ली, अंदर थी और नैना को अभी तक किसी ने चोदा न था। मैने अपने लंड को जरा सहलाया, टाईट किया और फिर चूत के दरवाजे, पर रगड़ मारी और एक धक्का, जोरदार और चूत को चीरता हुआ सीधा फौलाद जैसा लंड अंदर चला गया। इस वार से नैना हलकान हो गयी थी और फिर बिन कहे ही उसने मेरा साथ निभाना शुरु कर दिया था। अपने पैरों को आगे पीछे करते चूतड़ों को हिलाते हुए उसने लंड को दनादन अंदर बाहर लेना शुरु कर दिया था। धकाधक, पचापच, फचाफच और फिर क्या कहने, हल्का सा खून उसकी टांगों के बीच रिस रहा था पर नैना उसकी परवाह कब करने वाली थी।

मैने अपना खून से सना लोडा थोड़ा बाहर खींचा, वो फचफचाता हुआ एयर टाईट गन की तरह से बाहर आया। मैने दुबारा अपना लंड अंदर करने की बजाय उसके गाँड़ पर थूक दिया, उसकी नन्हीं प्यारी गाँड़ एकदम गजब लग रही थी। मैने एक उंगली गजब की गाँड़ में घुसाई तो वो उईईइमां मर गयी, इसमें कुछ नहीं जाएगा, प्लीज इसमें कुछ मत करो, ऐसा कहने लगी। मैने एक उंगली के बाद दो उंगलियां उसकी गाँड़ में घुसाईं और फिर से उसपर थूक दिया। इस बार आसानी से सरकता हुआ .अन्दर बाहर जाने लगा था। धीरे से मैने छेद को दोनों हाथों से पकड़ के उंगलियां लगा के खोल दिया और खुले गुलाबी गाँड़ के छेद में अपना थूक भर दिया। वाहह्ह!! एकदम झक्कास होते हुए इस घटनाक्रम को मैने अपने लंड से प्रारंब्भ करना चाहा। अपना लोडा जिसमें चूत की फटी झिल्ली का खून अब भी चिपटा हुआ था, उसको चूत पर रगड़ कर मैने गाँड़ में धक्का देना शुरु किया। आह्ह!!! अ अह्हाअह्ह्ह्ह!!! पेलो धीरे धीरे पेलो आह्ह मर गयी, आराम से करो। और मैने अपने लंड को दबाना जारी रखा।

वो एकदम से चिंहुकती हुई धीरे धीरे सामान्य होने लगी थी।गाँड़ का छेद खुल चुका था और मेरा लंड का लोडा अंदर विराजमान था। मैने अब गाँड़ पेलना शुरु किया। नैना की मदमस्त गाँड़ को पेल कर फाड़ने का मेरा सपना आखिर मेरी गर्लफ्रेंड ही पूरा कर रही थी। धक्के पर धक्का, रेले पर रेला और चूत और गाँड़ को कई बार बदल बदल के पेला। आह्ह्ह!! नैना चुदवाती रही और मैं चोदता रहा। नैना की कली सी चूत को चोदकर गुलशन बना दिया था मैने। निस्संदेह वह एक मजेदार कार्य था और मैने नैना की चूत का बताशा फिर बार बार पिया। उस नाले में हमारी मोहब्बत के जवां होने का यह कारनामा बरसों तक हमारे कालेज में गाया जाता रहा। नैना के साथ किये गये प्रेम के वो क्षण मुझे आज भी उतने ही सजीव रुप में याद हैं जितने की कल और अभी के किए गए सेक्स संबंध। सच है, पहला प्यार कभी नहीं भूलता और अगर इतनी सुंदर लड़की के साथ हो तो कतई ही नहीं।

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