बहन की ननंद सुमिता की ठुकाई

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राम राम दोस्तों में सार्थक आज एक नै कहानी लेके आप के सामने आया हूँ जो की मेरे साथ हो चुकी है और ये रियल कहानी है दोस्तों ये बात ८ महीने पहले की जब नेरी दादी ऑफ हुई थी हुआ ऐसा की दोस्तों हमारे में अगर अपने घर में कोई ऑफ होता है तो उनके घर का खाना कुछ दिनों के लिए बेस्वाद सा बनता है उस टाइम हमारे घर में उदासी सा माहौल था। बाकि सुब लोग वही खाना कहते थे लेकिन मुझे वह खाना पसंद नहीं आता था इस लिए पापा ने मेरी बहन की ननन्द को बुला लिए था मुझे खाना देने के लिए। दोस्तों मेरी बहन की ननन्द का नाम सुमिता था और वो दिखने में एकदम लाजवाब थी अगर कोई लड़का उसे देख ले तो अपने पेंट में ही उसका पानी निकल जाये।

अरे बातो बातो में में उसका फिगर तो बताना ही भूल गया। दोस्तों उसकी छाती 34 कमर 28 और उसकी गांड 36 की थी जिस वजह से वो पहलीबार मुझे दिखी तो मुझे आसमान से आई हुई पारी लगी वो हमेशा साड़ी पहनती थी और उस साड़ी में वो एकदम बेबीडॉल लगती थी। दोस्तों में उसे सुमिता कह कर ही बुलाता था क्यों की सुमिता और में दोनों सेम उम्र के थे सो अब में अपनी कहानी पर आता हु। दोस्तों मेरी और सुमिता की अच्छी जमती थी और हम दोनों आपस में बहुत मजाक भी करते थे जॉब भी हम लोग मिलते है तो मुझे वो सिर्फ एक ही बात पूछती की मेरी कोई गर्लफ्रेंड है की नहीं और हर टाइम उसे कुछ और बात कर के टाल देता था।

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क्यों की मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं थी लेकिन मुझे सुमिता के साथ बाटे करने में मज़ा आता था। एक दिन की बात है जब हम लोग बाते कर रहे थे और सुमिता ने अचानक मेरे गाल पे किश कर दिया में एकदम शोक सा रह गया फिर वो थोड़ी हसी और बात को टाल दिया तभी मुझे सुमिता पे शक हुआ की साला इस रांड के दिमाग में कुछ तो चल रहा है। फिर मेने भी जाने दिया और उसके अगले कदम की प्रतीक्षा करने लगा। लेकिन फिर वो हुआ जिसकी मेने कल्पना भी नहीं की तो आज मुझे घर आये काम से काम 11 दिन हो चुके थे इस बिच मेने और सुमिता ने खूब मज़े लिए और छेड़ा छाड़ि की लेकिन ज्यादा कुछ नहीं कर पाए। अगले दिन दादी का 12 दिन का क्रियाकर्म ख़तम हो चूका था फिर हम लोग अब बेड पे सो सकते थे।

दोस्तों दो दिन से बारिश बहुत हो रही थी और हमारे घर में सिर्फ 3 रूम थे दो बैडरूम और एक गेस्टरूम था तो में अपने रूम में सोने जाने लगा तब मुझे पीछे से मेरी माँ की आवाज सुनाई दी की सुमिता तुम भी सार्थक के रूम में जेक सो जाओ दोस्तों बारिश था उस टाइम थोड़ी ठंडी भी थी। तो  एक मोटा चादर हमे दे दिया और कहा की अगर रात को अगर ठण्ड लगे तो में बहुत ही खुश था जिस वजह से मेरा लण्ड बहुत ही बड़ा हो गया तो में जल्दी से जाके बेड पे बैठ गया फिर सुमिता सरे दरवाजे बंद कर के अंदर आई और मेरे बेड पे लेट गई सुमिता मेरी साइड लेटी थी और सोने की कोशिश कर रही थी।

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लेकिन मेरी आखो में नींद नहीं थी दोस्तों मुझे आज तक ऐसी फिलिंग नहीं हुई थी जैसी आज हो रही है में तो बस उसको पेलने की फ़िराक में था फिर मेरे उपहार कामदेव की कृपा हुई और मुझे थोड़ा जोश आया और में उठा और दरवाज़े की कुण्डी लगा दी तो उसने कहा की कुण्डी क्यों लगाई इतने में सुमिता कुछ कर पाती मेने उसको जकड लिए मेरी तरफ खींच लिया। सुमिता मना करने लगी, कि माँ जाग जायेगी. ये सब ठीक नहीं है, पर ज्यादा फोरस नहीं कर रही थी. मैंने थोड़ा जोर दिया, कि कुछ नहीं होगा, कोई नहीं जानेगा. मैं तो बस तुम्हे पकड़कर सोना चाहता हु. वो मना कर रही थी और मैं उसको पकड़कर सोने की जिद कर रहा था. थोड़ी सी जिद के बाद सुमिता ने भी प्रोटेस्ट करना बंद कर दिया.

हाथ के ऊपर हाथ को रखने सोने की एक्टिंग करने लगा. मैंने सोचा, अच्छा मौका है हाथ साफ़ करने का और मैंने अपना हाथ खीच के सुमिता के साड़ी के अन्दर सुमिता के पेट पर रख दिया और कसके जकड़ लिया. सुमिता थोड़ी सी मेरे बदन से चिपक गयी और कहने लगी, कोई जाग जाएगा. माँ उठ जायेगी. तो मैंने थोडा कन्वेंस किया, तो सुमिता मान गयी और मैं अपना हाथ थोडा-थोडा ऊपर लेता गया और फाइनली सुमिता के रसीले आम को मैंने पकड़ लिया. एक अजीब सी करंट मेरे शरीर में दौड़ गयी. मेरे बदन का रोम-रोम सिहर उठा. शायद फर्स्ट टाइम ऐसा ही होता होगा, ये मैंने मन ही सोच लिया. सुमिता मन करने लगी, पर मैं कहाँ मानने वाला था. मैंने वैसे ही सुमिता के चूची को पकड़ा और थोड़ी देर के बाद एक-एक करके उसकी ब्लाउज के ऊपर के दो हुक खोल दिए.

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अब मैंने अपना हाथ ब्लाउज के अन्दर घुसा दिया. वह मानो जन्नत की कोई हसीन चीज़ मेरे हाथ लग गयी हो. इसके पहले मैंने बहुत साड़ी ब्लू फिल्म देखी और मुझे पता था, कि इसके आगे क्या करना है. सो मैंने सुमिता के दूध को मसलना शुरू कर दिया. सुमिता अपनी आँखे बंद किये हुए कुछ बडबडा रही थी. शायद वो मोअनिंग कर रही थी. मैं उस तरफ ध्यान ना देते हुए, बाकि के बचे हुक को भी खोलने लगा. मैंने उसके ब्लाउज को उतार फेंका. वो यार क्या नज़ारा था. आज तक मैंने जो चीज़ ब्लू फिल्म में ही देखी थी वो आज मेरे सामने थी. मैं खुद पर कण्ट्रोल नहीं कर सका और टूट पड़ा उन प्यारे कप साइज़ दूध के ब्राउन निप्पल पर. वो एकदम इरेक्ट हो चुके थे. सुमिता ने मुझे हटाया और मेरे लिप्स पर अपने लिप्स रख दिए.

मैं मान ही मान खुश हुआ, कि चलो आखिर में साली माँ की लौड़ी जो इतने दिनों से मुझे परेशान किये हुई थी, आज मेरे सामने अर्ध नंगी हो के लेटी है. खूब जोर से हमारी किस चल रही थी. मैं उसकी जीभ चूस रहा था और वो मेरी. मैंने उसे नीचे बेड पर गिरा दिया और उसको सर से लेकर पेट तक चूमने लगा. अंजू बस मोअन किये जा रही थी. आहाहाहः हहहहः आआआआआआ ऊऊऊ बस करो विराज आहाहाह….मर जाउंगी …. बस करो … और मैं भी कहाँ रुकने वाला था. एक हाथ से उसके दूध को दबाता रहा. मैंने अपनी जीभ से उसकी नाभि चाटे जा रहा था. मुझे उसकी नाभि चाटने में बड़ा मज़ा आ रहा था, वो मानो मछली की तरह उछल रही थी. फिर मैंने उसके निप्पल को मुह में भरा और जोर से चूसने लगा.

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अंजू – खा जा इसे. चबा डाल. बहुत हैरान किये हुए है और तेरे लिए ही बचाकर रखे है. सक इट हार्डर. मोर हार्डर हहहहः ऊऊऊऊऊ म्मम्मम्मम एस बेबी. सक इट.. अहहः हहहः एस मोर मोर एस एस डार्लिंग … एस ..ऊऊऊ … ऊऊऊओ उसकी आवाज़े तेज होने लगी थी. अब मुझे डर लगने लगा था, कि ये आवाज़े माँ ना सुन ले. इसलिए, मैंने उसके मुह में एक कपड़ा ठूस दिया और उसके मुह को बंद कर दिया. लेकिन मैंने अपने काम को जारी रखा और उसके चूचो को चूस-चूसकर लाल कर दिया और अपने दांत भी गडा दिए. उसके चूचो पर मेरे दांत के निशान आ गये.

फिर उसने मेरे पेण्ट के उपहार से मेरे लैंड को पकड़ लिया और दबाने लगी जैसे ही मेने उसे अपनी पेण्ट उतर ने को कहा उसने जल्दी से मेरी पेण्ट को निचे कीच लिया। फिर सुमिता मेरे लण्ड को मेरे अंडरवेअर से बहार निकाल लिया और उसको गुरने लगी। मेरा लैंड एवरेज 7″ का है मोटा भी कोई भी चुत को संतुष्ट करने के लिए काफी है उसने मेरे लंड को देखा तो उसके मुँह पे अजीब सी मुस्कान थी। उसे पता था, कि ये मेरा पहली बार है. इसलिए उसने जल्दी ना करते हुए, धीरे – धीरे लंड को ऊपर नीचे करना शुरू किया. काफू सीखी हुई खिलाडी थी. मैं अपने पर कण्ट्रोल नहीं रख पा रहा था और मैंने उसे जड़ से तेज हिलाने को कहा. तो उसने तेजी से हिलाना शुरू कर दिया और ४-५ मिनट में ही मैं झड़ गया. ये जो लम्हा था, क्या बताऊ स्वर्ग था, बड़ा सुख मिला मुझे. मुझे पता था, कि ये तो शुरुवात थी. फिर उसने सारा माल अपने हाथो से साफ़ किया. इतना सारा कम आज पहले कभी नहीं निकली थी. उसके बाद उसने मुझे फिर से किस करना शुरू किया.

मैं भी धीरे-धीरे मूड में आने लगा था और लंड फिर खड़ा होने लगा. इस बार लंड कुछ ज्यादा बड़ा और फुला हुआ था. अंजू की आँखों में चमक आने लगी थी और वो अपने होठो पर अपनी जीभ फेर रही थी. मेरे चेहरे पर स्माइल आ गयी और मुझे समझ आ गया था, कि मुझे क्या करना है? मैंने उसे झट से सुलाया और उसके सुंदर ब्राउन चुचियो को मसलने लगा. वो मोअन कर रही थी अहहहः हहहः विराज ..कुछ करो ना …अब सहन नहीं हो रहा .. जल्दी करो ना … और नहीं सहा नहीं जा रहा. अब मैं उसे चुमते हुए, धीरे-धीरे उसके पैरो तक पहुच गया और वहां उसको किस करने लगा. फिर धीरे-धीरे उसकी साड़ी को उठाने लगा और किस करता रहा. देर ना करते हुए, मैंने साड़ी को उसकी कमर तक उठा दिया और पेटीकोट साड़ी को निकाल फेंका. क्या गजब लग रही थी सुमिता. आँखों पर यकीं नहीं हो रहा था. सुमिता की पेंटी भीगी हुई थी. शायद उसने पानी छोड़ दिया था. सुमिता शर्मा रही थी और अपने हाथो से उसकी पेंटी को छुपा रही थी. मैंने सुमिता के हाथो को चूमा और हटा दिया और फिर साइड से थाई को खूब चाटा और चूमा. फिर उसकी पेंटी को भी निकाल फेंका.

चूत पर हलके ब्राउन बाल थे, शायद १-२ दिन पहले ही काटे होंगे. मैंने सुमिता के ऊपर लगे हुए जूस को साफ़ किया. मैं सुमिता की चूत के ऊपर किस कर रहा था. सुमिता ने मुझे कहा, कि ये गन्दा है. पर मैंने कहा – कि मैं इसे टेस्ट करना चाहता हु. वो मना कर रही थी और मेरी बड़ी जिद करने पर मुश्किल से मानी. फिर क्या था, मैं तो टूट ही पड़ा उसकी चूत पर. मैंने सुमिता की चूत पर किस कर रहा था और धीरे से मैंने अपनी ऊँगली उसकी चूत में डाल दी. क्या गरम थी उसकी चूत ….अहहहः … म्मम्मम्मम … हहहहहः ….. आआआआ …भट्टी जैसी …. चूत को मैं चूमता गया और फिंगर से फक करता रहा. मर गयी …ओगोगोगो …मर गयी.

अंजू – धीरे करो अहहहः हहहहः हहहहः … प्लीज धीरे करो ना …ऊऊऊओ .. म्मम्मम और मेरे सिर को उसकी चूत पर दबा रही थी. शायद उसे मज़ा आने लगा था. मुझे भी उसके जूस का टेस्ट एकदम मलाई के जैसा लग रहा था, लकिन थोडा नमकीन था. उसके बाद मैंने अपनी जीभ उसकी चूत के अन्दर डाल दिया. तो वो सिस्कार उठी और अपना अपनी मेरे मुह पर छोड़ दिया. फिर मुझे खीच के मेरे मुह पर लगा जूस चाटने लगी और देर ना करते हुए, उसने मेरे लंड को पकड़ा और अपने चूत के पास ले आई. और धक्का लगाने को कहा. मैंने एक ही बार में आधे से ज्यादा लंड घुसा दिया. तो सुमिता चिल्ला उठी .. ऊऊऊऊउईईईईईइ माँआआआआआअ … मार डाला. आहाहहहः आहाहहहः ऊऊऊओ. मार डाला कमीने, बहनचोद …. बहुत टाइट पुसी थी सुमिता की. बहुत दिनों से चूत में शायद कोई लंड नहीं डलवाया था उसने, इसलिए उसकी चूत बहुत टाइट थी. फिर, मैंने एक और जोर का धक्का मारा और मेरा पूरा लंड का पूरा लंड उसकी चूत में घुस गया.

सुमिता– चोद साले … चोद … जान. चोदो ना अहहः हहहः हहहहः म्मम्मम मैं – हाँ जान ये लो मेरा लंड .. और मैं और भी जोर से धक्के लगाने लगा. सुमिता – फाड़ डाल, इसे फाड़ डाल. हहहः म्मम्मम अहहहहः. … बहुत दिनों से परेशान किया हुआ था इसने. इऐऐऐअ इसिसिसिसिस म्मम्मम्मम आज इसे फाड़ डाल. मैं – अपनी जितनी ताकत थी. सभी को मिला के उसे चोदने पर तुला हुआ था. दोनों का शरीर पसीने में मानो डूबा हुआ था. उसके बाद मैंने सुमिता के पैरो को अपने कंधे पर लेके चोदना शुरू किया. सुमिता भी अच्छा कोआपरेट कर रही थी. करीबन आधे घंटे की चुदाई के बाद, मेरा निकलने वाला था. इस बीच सुमिता ने जाने कितनी बार अपना पानी मुझपर छोड़ दिया होगा. मैंने उसे पूछा, कि कहाँ छोडू? तो उसने अन्दर ही छोड़ने को कहा. तो १ मं के बाद, मैंने अपना सारा माल उसकी चूत के अन्दर डाल दिया.

सुमिता – अहहहहः म्मम्मम्म मरे राजा. मुझे बना ले अपनी रंडी. मुझे आज से अपनी बना ले. अब से तू जब भी चाहे, तब मुझे चोदना. ये कहकर उसने मुझे अपने सीने से लगा लिया. १ घंटे बाद हम उठे और बाथरूम में साफ़ होने के लिए चले गये. बाथरूम से आकर हम दोनों नंगे ही एकदूसरे से चिपक कर सो गये. उसने मेरा लंड पकड़ा हुआ था और मैंने उसकी चुचियो को पकड़ा हुआ था. अगले तीन-चार दिन तक मैंने उसे काफी चोदा. दिन और रात में, जब भी मौका मिला और हर पोज में.

 

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