रश्मि आंटी की चुत और गांड चुदाई

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दोस्तों ये कहानी मेरे दोस्त की माँ की है मेरा दोस्त अक्षय और मेरी दोस्ती को अब ६ साल हो गये थे. हम दोनों साथ में टेनिस खेलने जाते थे और वहीँ हमारी दोस्ती हुई थी. अक्षय के डेड दत्ता अंकल एक बिल्डर थे और वो बहुत ही रंडीबाज आदमी थे. अक्षय की माँ रश्मि चाची बहुत ही सेक्सी थी, जिनकी उम्र कुछ 35 की होगी. लेकिन, वो किसी भी एंगल से 28 के ऊपर नहीं लगती थी. रश्मि चाची की गांड बहुत ही सेक्सी थी और मैंने बहुत बार चाची की गांड को याद करके मुठ मारी थी. चाची के बूब्स भी वैसे बहुत सैक्स्ट थे. लेकिन, मुझे उनकी गांड में ज्यादा दिलचस्पी थी. साड़ी के अन्दर जब वो चलती थी, तो उसकी पीछे से बिलकुल गोल गांड देखकर मेरा लंड मुझे बतमिज़ बना देता था. अक्षय के घर में, अक्सर आता – जाता रहता था. हम लोग उसके लैपटॉप पर भी कभी – कभी ब्लूफिल्म देख लेते थे.

एकदिन, मुझे कुछ काम था. इसलिए मैं अक्षय के घर गया. अक्षय मेरे साथ 15 मिनट बैठकर फिर बोला, कि मैं कजरी से मिलकर आता हु. कजरी उसकी गर्लफ्रेंड थी और मुझे पता चला गया था, कि वो जरुर उसकी चूत लेने जा रहा था. मैंने अक्षय के लैपटॉप पर काले हब्शी की फिल्म लगाकर बैठ गया. अक्षय ने मेरे सामने रश्मि चाची को फ़ोन किया, कि वो बाहर जा रहा है. १ घंटे बाद लौटूंगा. उसने चाची को ये नहीं बताया, कि मैं घर पर हु. अक्षय के जाने के बाद, मैंने फिल्म देखना चालू किया. फिल्म ख़तम हो गयी और मुझे प्यास लगी थी. मैंने देखा, कि पानी की बोटेल खाली थी. मैंने सोचा, कि चलो मैं ही उठकर किचन के फ्रिज से पानी निकाल लाता हु. मैं किचन की तरफ चल दिया.

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मैं किचन के पास पहुचने ही वाला था, कि मेरे कान में अहहहः अहहाह ऊह्ह्ह्ह की आवाज़ आई. बाजु में ही रश्मि चाची का कमरा था. तो क्या चाची के रूम से आवाज़ आ रही थी? मैंने खिड़की के एक छेद से झांक कर अन्दर देखा…. मेरे हाथ से बोटेल छुटने ही वाली थी. अन्दर रश्मि चाची अपनी झांटो से भरी चूत फैलाकर बैठी हुई थी. चाची के गांड में एक बड़ा डिलडो अन्दर – बाहर हो रहा था. चाची की गांड के अन्दर डिलडो पूरा का पूरा अन्दर जाता था और फिर चाची उसे बाहर निकालकर वापस अन्दर ले रही थी. चाची के मुह से मोअनिंग निकल रही थी और वो साथ ही साथ अपने बूब्स से भी खेल रही थी.

मेरा लंड मेरी पेंट के अन्दर ही खड़ा हो गया. वैसे भी मैंने ब्लूफिल्म देखि थी और मुठ मारने ही वाला था. चाची को इस हालत में और उसकी गांड देखकर, मेरा लंड तो बिलकुल उतेजित हो चूका था. तभी मैंने देखा, कि चाची ने डिलडो को गांड से निकाला और चाची की गांड मुझे साफ़ दिखने लगी. चाची गोरी थी, लेकिन उसकी गांड का हिस्सा थोडा डार्क कलर का था. मेरे दिमाग में ख्याल आया, कि अगर चाची चोदने दे दे. तो मजा आ जायेगा. और वैसे भी चाची गरम थी. इसलिए उसे भी चुदवाने में दिक्कत नहीं होगी.तभी, मेरे दिल में ख्याल आया और मैंने बोतल को जानबूझकर के नीचे फेंक दी. बोतल की आवाज़ सुनने के बाद, चाची खड़ी हो गयी. मैंने देखा, कि उसने फट से कपड़े पहने और वो बाहर आ गयी. येलो साड़ी में वो कयामत लग रही थी.

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उसने मुझे देखा और बोली – विराट तू यहाँ? मैं आँख से आँख मिलाते हुए कहा – हाँ, चाची. मैं तो १० मिनट से आप को ही देख रहा था. चाची ये सुनकर हैरान सी हो गयी. उसने मुझे रूम में ले जाते हुए कहा, अक्षय को कुछ मत बताना, विराट प्लीज. उसे बहुत बुरा लगेगा. मैंने कहा – मैं नहीं बताऊंगा कुछ भी. लेकिन मेरा फायदा क्या होगा? चाची मेरी बात समझ गयी और बोली, तुझे १००० रूपये दूंगी. मैंने कहा – नहीं चाची. मुझे आप की गांड देखनी है. और आपको मेरे साथ सेक्स करना पड़ेगा. चाची बोली – विराट किसी ने देख लिया तो. मैंने कहा, चाची अंकल तो रात से पहले आते नहीं है. अक्षय को मैं देख लूँगा. चाची ने मेरा हाथ पकड़ा और बोली, देखो मैं बदनाम नहीं होना चाहती. मैं पहले से ही तेरी अंकल की बेरुखी से हैरान हु. मैंने कहा, चाची घबराईये मत.

आज से आप को सेक्स को लेके कोई प्रॉब्लम नहीं होगी. मैंने फट से चाची के बूब्स पकड़ लिए और उसे दबाने लगा. चाची ने जल्दी में ब्लाउज के नीचे ब्रा नहीं पहनी थी. जिस से उनके बूब्स मेरे हाथ में मस्त फिसल रहे थे. चाची मेरी तरफ हैरानी सी होकर देख रही थी. लेकिन, मुझे कुछ भी करके आज चाची की गांड में लंड देना ही था.मैंने चाची के सारे कपडे एक – एक करने उतार दिए और मैं खुद भी नंगा हो गया, चाची मेरे लंड की तरफ देख रही थी. मैंने सीधा चाची के पास जाके, उनके मुह में मेरे लंड को दे दिया. चाची मेरे लंड को चूसने लगी और मैं उसके स्तन के साथ खेलने लगा. चाची को भी अब मेरे टच का मज़ा आने लगा था. क्योंकि वो बड़े प्यार से लंड को चूस दे रही थी. कुछ देर लंड चूसने के बाद, मेरी इच्छा चाची की चूत देखने की हुई.

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मैंने लंड को चाची के मुह से निकला और चाची को पलंग पर सुला दिया. चाची की झांटो को हटाते हुए, उनकी मस्त गरम चूत के अन्दर जैसे ही ऊँगली की; चाची की सिसकारी निकलने लगी… पाप्प्पूऊऊउ… अहहहः अहहहः. मैंने पूरी की पूरी ऊँगली अन्दर कर दी. और धीरे से उसे अन्दर – बाहर करने लगा. चाची ने अपनी आँखे बंद कर दी और मजे से मेरी ऊँगली से चुदवाने लगी. मैंने एक हाथ से चाची की चूत में ऊँगली की और दुसरे हाथ से मैं अपने लंड के सुपाडे को सहला रहा था. चाची के बूब्स के चुचे भी मस्त खड़े हो गये थे. मैंने चाची की चूत में तभी, एक साथ दो ऊँगली डाल दी और जोर – जोर से धक्के लगाने लगा. चाची की तो जैसे, जान ही निकल रही थी. वो मुझे पकड़ के अपनी तरफ खीच रही थी. मेरे लंड में अजीब सा कसाव आया था और लंड को भी अब चूत चाहिए थी.

मैंने चाची के चूत से ऊँगली निकाली और अपने लंड के सुपाडे को उनकी चूत के छेद के ऊपर रख दिया. चाची की अहहः अहहहः निकल रही थी. मैंने इसे नजरंदाज करते हुए, लंड को उनकी चूत के अन्दर घुसा दिया. चाची की चूत अन्दर से बहुत गरम थी और मेरी छोटी झांटो के साथ चाची की लम्बी झांट मिक्स होने लगी. इस हेयर चाची की चूत बजाते – बजाते हुए, मैंने उनकी गांड के अन्दर धीरे से ऊँगली दे दी. चाची की गांड उनकी चूत से भी ज्यादा गरम थी. मैंने चूत की चुदाई जारी रखी और उनकी गांड में ऊँगली करना चालू कर दी. मैं तभी नीचे झुका और चाची के बूब्स चूसने लगा. ये सुख चाची के लिए अहसाय हो रहा था. उसकी चूत और गांड और बूब्स को एक साथ खुश किया जा रहा था. चाची के गाल लाल – लाल हो गये थे और मैंने उसे और भी जोर – जोर से चोदने लगा. अब जैसे की चाची की गांड मेरे लंड को बुलाने लगी थी.

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चाची को मैंने अब उल्टा लिटा दिया और उसकी गांड को दोनों हाथ से फैला दिया. चाची की मस्त गांड का छेद मेरे बिलकुल सामने था. बस उसमे लंड डालने की देरी थी. मैंने लंड के सुपाडे को गांड पर रखा. लेकिन, चाची की गांड बहुत सख्त थी. मैंने चूत में ऊँगली डालकर थोड़ी चिकनी की और लंड के सुपाडे पर लगाकर उसको चिकना किया. इस चिकनाहट की मद्दत से लंड थोडा अन्दर घुसा. अब मैंने एक जोर का झटका लगाया और चाची की गांड में पूरा लंड दे दिया. रश्मि चाची चीखी विराट….प्प्प्पप्प्प्प आहाहहः आआअह्हह्हह ऊऊऊऊईईईईइमा … पर सुनता कौन था. मैंने गांड को दोनों हाथ से साइड से पकड़ा और मैं थोडा ऊपर उठा और जोर – जोर से चाची की गांड में मेरे लंड के झटके लगाने लगा. चाची भी अब अबबबबा ऊऊओ करते हुए अपनी गांड हिलाने लगी. मेरे लंड के ऊपर गांड में अजीब प्रेशर आया हुआ था.

मैंने चाची के कुल्ल्हे पकडे और जोर – जोर से लंड अन्दर डालने लगा. तभी मेरे मुह से एक बड़ी आआआआआ निकली और मेरे लंड की पिचकारी छुट गयी. चाची के गांड के अन्दर ही मेरा वीर्य निकल गया. कुछ देर तक, हम ऐसे ही लेटे रहे और बाद में चाची उठी और हमारे लिए कॉफ़ी ले आई. अक्षय को मैंने फ़ोन किया और उसने बताया, कि वो २० मिनट और लेगा. मैंने कॉफ़ी पिने के बाद, अपने लंड को फिर से चाची के मुह में डाला और मुह में ही अपना माल छोड़ दिया. इस दिन के बाद तो चाची की गांड और चूत जैसे की मेरी मिलकियत बन गयी. पहले चाची थोड़ी – थोड़ी कतराती थी, लेकिन अब वो भी सामने से मुझे अकेले में घर बुलाके मेरे लंड के मजे लुट लेती है … !!!

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