मेरी बड़ी बहन नंदिता मुसलमान के लड़के के साथ

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हाय दोस्तों कैसे हो. मेरी दूसरी बहन का नाम नंदिता है. मेरी बहन नंदिता को गन्दी किताब पढ़ने की बुरी आदत हो गयी थी. अपनी किताब मे चुदाई की कहानियो की किताब छुपाकर पढ़ने के बहाने चुदाई की कहानी पढ़कर अपनी चूत मे उंगली डाल कर चुदाई के मज़े लेती थी. अपनी चूत में उंगली डाल कर और पैर (लेग्स) हिला हिला कर खूब आनंद लेती थी. मेरी बहन नंदिता हमारे पड़ोस मे रहने आये पंजाबी के साथ काफ़ी घुल मिल गयी थी. उसकी बीवी और दो बच्चे थे. मेरी बहन नंदिता उसे जीजाजी कहा करती थी. गर्मी के दिन मेरी बहन नंदिता और मेरी माँ घर के आँगन मे रात को चारपाई पर साथ मे सोये हुये थे. रात को करीब 1 या 2 बजे पंजाबी रात को मेरी बहन की चारपाई के पास बेठ गया. पंजाबी मेरी बहन को धीरे धीरे सहलाने लगा. मेरी बहन नंदिता चुपचाप पड़ी रही. थोड़ी देर के बाद पंजाबी ने मेरी बहन का फ्रॉक ऊँचा करके उसके स्तन (बूब्स) को दोनो हाथो मे पकड़ कर मसलने लगा और दबाने लगा. मेरी बहन नंदिता भी उतेज़ित होकर मजा लेने लगी.

थोड़ी देर बाद मे पंजाबी मेरी बहन को खींच कर बाथरूम की तरफ ले जाकर चुदाई करने ही वाला था की मेरी माँ जाग गयी. पंजाबी डर कर भाग गया. मेरी बहन नंदिता शरीफजादी बनकर अपनी सफाई देने लगी की मुझे खबर नही थी की पंजाबी मेरी चारपाई पर आकर उसे कब से दबोच कर उसके स्तन को मसल कर सहला रहा है. मेरी बहन नंदिता का हमारे पड़ोस मे रहने वाला मुसलमान के लड़के के साथ नाजायज़ सेक्स सम्बन्ध थे. उस समय उसकी उम्र 18 साल थी. एक रात को जब मेरी माँ ने देखा की मेरी बहन नंदिता घर मे पलंग पर सोई हुई नही है. उसने मुझे जगाया. मैने आस पास जाकर देखा और उसको ढूँढने लगे. रात के 2 बजे मेरी बहन आज़म के पास जाकर चुदवा रही थी. आज़म का नाम आज़म था. आज़म ने मेरी बहन को पूरा नंगा करके उसकी कुँवारी चूत मे अपना मोटा 9 इंच का लंड डाल दिया.

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मेरी बहन नंदिता की चूत की झिल्ली फट गयी थी और चूत भी फट गयी थी. बहन की चूत में से खून निकल रहा था. मेरी बहन नंदिता ठीक तरह से चल भी नही पा रही थी और लंगड़ी लंगड़ी चल रही थी. मेरी बहन ने अंदर चड्डी भी नही पहनी थी सिर्फ़ फ्रॉक पहना था. मेरी बहन की चूत चुदाई की वजह से सूजकर (फूलकर) लाल टमाटर की तरह हो गयी थी. उसकी योनि (चूत ) भी फट गयी थी. बहन की चूत में से आज़म आज़म का वीर्य और पहली चुदाई का खून निकल कर मेरी बहन की चूत से धीरे धीरे निकल कर जाँघ पर से टपक टपक कर बह रहा था और पैर में भी खून के दाग दिखाई दे रहे थे. मेरी बहन की चूत पर बाल भी नही थे क्योकी बहन ने अपनी चूत के बाल ब्लेड से काटे थे. इसलिये बहन की चूत बिल्कुल साफ दिख रही थी.

बहन की चूत एकदम लाल लाल टमाटर की तरह दिख रही थी और चूत का अन्दर भाग एकदम लाल कलर का था. मेरी माँ ने घर ले जाकर उसे पलंग पर सुला कर उसका फ्रॉक उतार कर बहन को नंगी करके बहन की चूत देखी. बहन की चूत फटी हुई थी और चुदाई की वजह से लाल हो गयी थी. बहन की चूत में से वीर्य और पहली चुदाई का खून निकल कर उसकी जाघो और फ्रॉक पर गिरा था. फ्रॉक पर भी कही जगह खून के लाल दाग की वजह से खराब हो गये थे. बहन रो रही थी और सिसकारिया मार रही थी. मेरी बहन की चुदाई की वजह से बुरा हाल हो गया था. मेरी माँ ने उसे खूब पिटा और कहने लगी रंडी चुदाई के मज़े लेकर आ गयी.

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आज़म ने तो तेरी चूत की बराबर की चुदाई की है, तेरी चूत तो फट गयी है और खून के साथ आज़म का पानी भी तेरी चूत से निकल कर जाँघो पर बह रहा है. रंडी आज़म से काला मुँह करवा लिया. उसने तुझे चोदते समय निरोध लगाये थे की नही? मेरी बहन ने रोते हुये कहा उसने निरोध लगाये बिना ही मुझे चोदा है. आज़म ने मुझे कहा था की निरोध लगाकर चोदने से चुदाई का मज़ा नही आता है, इसलिये उसने मुझे निरोध लगाये बिना ही चोदा है. मेरी माँ ने पूछा रंडी जब तुझे लंड डाला तब चिल्लाई नही और अब रो रही है, आज़म ने दिल खोल कर चूत की चुदाई करके मज़े लिये है. रांड़ चड्डी कहाँ पर डाल कर आई है? मेरी बहन कुछ भी नही बोली.

मेरी माँ ने उसे बाथरूम में ले जाकर बहन को नहलाया और बहन की चूत में अपनी उंगली डाल डाल कर रग़ड रग़ड कर बहन की चूत पानी से साफ की. माँ को डर था की कही आज़म का वीर्य नंदिता के गर्भाशय में चला गया हो तो शायद उसकी बेटी गर्भवती (प्रेग्नेंट) हो सकती है आज़म के नज़ायज़ बच्चे की माँ बन कर. मेरी बहन खूब ही चिल्लाती थी और झटपटाती रहती थी. वो कराह रही थी और सिसकारिया मार मार कर रो रही थी. मेरी बहन अपनी पहली चुदाई की वजह से दूसरे दिन बिस्तर पर से उठ भी नही पा रही थी. मेरी बहन को पलंग पर पूरा नंगी देखकर और उसकी गोरी गोरी लाल लाल टमाटर की तरह सूजी हुई चूत देखकर मुझे भी इच्छा हुई और मेरी भी कामुकता भड़काने लगी की अपनी रंडी बहन को चोद दूँ. लेकिन उतनी हिम्मत नही की उसकी चुदाई करूँ.

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मेरी माँ ने उसे लेडी डॉक्टर के पास ले जाकर गर्भ निरोधक गोलिया खिलाई, वरना वह भी अपने कुंवारेपन में ही गर्भवती (प्रेग्नेंट) हो जाती, और आज़म के नज़ायज़ बच्चे की माँ बन जाती. उसके बाद जब भी मेरी बहन को मोका मिलता चुपचाप घर से निकल कर आज़म के पास जाकर अपनी मस्त चुदाई करवा के आती. जब भी वह चुदवा के आती, बहन ठीक तरह से चल नही पाती थी, अपनी गांड और कूल्हे फेला फेला कर चलती थी. क्योकी आज़म अपना 9 इंच के कड़क लंड से मेरी बहन की चूत की बहुत बुरी तरह से चुदाई करता था. मुझे यह इसलिये मालूम है की आज़म मेरे पड़ोस में रहता था और मुझसे बड़ा था लेकिन हम सब से उसकी दोस्ती थी.

वह अपना लंड निकाल कर सब को दिखाता था. उसका लंड मोटा काले रंग का था. और झाट के बाल भी उसके बहुत सारे थे. आज़म मुझसे कहता था की तेरी बहन की तो में मस्त चुदाई करता हूँ, ज़रा अपनी बहन की चूत तो देख कर आ. में क्रोध से तिलमिला उठता था लेकिन में कुछ नही कर सकता था क्योकी जब बहन ही अपनी मर्जी से उसके पास जाकर चुदवाती है. एक दिन सुबह मैं अंदर के रूम में अचानक गया. हमारे अंदर के रूम मे ही नहाने धोने के लिये बाथरुम है. अंदर जाते ही मैने देखा की मेरी बहन पूरी नंगी खड़ी है. उसके बदन पर एक भी कपड़ा नही था. उसकी चूत पर खूब सारे झांट के बाल थे.

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उसके स्तन भी बड़े बडे गोलाई लिये हुये सुडोल और भरावदार थे, अभी भी बहन के स्तन पहले से ज़्यादा बड़े बड़े साइज़ के और मस्त है. मैं अपनी बहन को पूरा नंगी देख कर बोखला गया. मेरी बहन नंदिता भी शर्मा गयी, और शर्म से लाल लाल होकर अपना मुँह नीचे करके अपनी आँखे नीचे की तरफ झुका ली. मेरे दिलो-दिमाग मे कामुकता का भूत सवार हो गया. मैं अपनी बहन से ही संभोग करने के लिये मानो उतावला होकर पागल सा गया और अपनी ही बहन की चुदाई करने के लिये तड़पने लगा. लेकिन मजबूर था, क्योकी बाहर के किचन मे से मेरी माँ चिल्लाने लगी की तेरी बहन नहा रही हे. मुझे मजबुर होकर वापस लोटना पड़ा. उसका मुझे आज भी बहुत ही खेद और दुख है

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