माँ की चुदाई मेरी गलती से हुई

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हैल्लो दोस्तों मेरा नाम विक्रम है और आप सभी का Chudaistory.org पर स्वागत है में इस साईट का बहुत बड़ा फैन हूँ और मुझे इस वेबसाइट पर कहानियाँ पढ़ना बहुत अच्छा लगता है। दोस्तों आज में आप लोगो को ऐसी स्टोरी बताने जा रहा हूँ जिसे पढ़कर आप लोग को ये पता चलेगा कि कैसे एक बेटे की गलतियों से उसकी माँ चुद गयी। दोस्तों मेरे घर में में, मेरे पापा, मेरी माँ और मेरी एक दीदी है। मेरी दीदी का नाम जान्हवी है और वो चेन्नई के एक इंजिनियरिंग कॉलेज में पढ़ती है लेकिन पहले में आपको अपनी माँ के बारे में बता देता हूँ। मेरी माँ का नाम रागिनी है और वो दिखने में बहुत ही सुंदर है.. उनका फिगर बहुत ही हॉट और कामुक है.. उनकी गांड बिल्कुल गोल और बड़ी है। माँ घर में मेक्सी पहनती है और बाहर जाती है तो सलवार सूट या साड़ी पहनती है मेरी माँ सलवार सूट बहुत ही टाईट पहनती है फिर जब भी माँ बाहर जाती है तो सारे पड़ोस के अंकल उन्हें घूर घूर कर देखते रहते है और उनकी सलवार से उनकी पेंटी का आकार दिखता रहता है और कई बार मेरे गांव के सारे लड़के मेरी माँ के बारे में गंदी गंदी बातें भी करते रहते है।

मुझे अच्छी तरह से याद है एक बार में एक दुकान पर समान खरीदने गया हुआ था। वहाँ पर पास में कुछ लड़के थे जो सिगरेट पी रहे थे.. उन्ही में से एक का नाम अर्जुन था.. उसने मेरी तरफ अपने दोस्तों को दिखा कर कहा कि पता है इसकी माँ बहुत गरम है.. इतनी टाईट सलवार पहनती है कि मन करता है उसकी सलवार यहीं पर फाड़ दूँ और उसकी गांड मारूं। में उस समय छोटा था तो मुझे इतनी बातें समझ में नहीं आती थी और मुझे उनसे बहुत डर भी लगता था कि कहीं वो लोग मुझे पीट ना दें। फिर एक दिन मैंने माँ को ये बात बताई तो माँ ने मुझसे कहा कि तुम उनकी बातें मत सुना करो.. वो लोग गंदे है मैंने कहा कि ठीक है। फिर मैंने कहा कि माँ वो लड़के हमेशा मुझे देखकर मुझसे कहते थे कि क्या घर पर तेरी माँ अकेली है और अगर में कहता हाँ अकेली है तो वो लोग मुझसे कहते थे कि ठीक है आज तेरी माँ को चोदने में जाता हूँ। फिर मुझे बहुत बुरा लगता था।

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तभी एक दिन उन्होंने मुझसे कहा कि अगर तू मुझे अपनी माँ की चूत दिलवाएगा तो हम तुझे एक क्रिकेट बॉल खरीद कर देंगे। फिर मैंने कुछ नहीं कहा और में रोता हुआ घर पर चला आया तो माँ ने मुझसे पूछा कि क्या हुआ? मैंने कहा कि कुछ नहीं और में अपने कमरे में चला गया.. लेकिन मुझे उस समय तक इतना भी नहीं पता था कि चूत का मतलब क्या होता है? मुझे बस इतना समझ में आता था कि वो लोग मेरी माँ के बारे में बहुत गंदी गंदी बातें करते है और इस बात को करीब 6 महीने हो गये और ऐसा ही चलता रहा और वो लोग हमेशा मेरी माँ के बारे में गंदी गंदी बातें करते थे और में चुपचाप सुनता रहता था। फिर एक दिन की बात है हमारे सामने के फ्लेट में एक 30 साल का आदमी रहने आया.. उसका नाम रिषभ था वो जयपुर से चेन्नई बिजनेस के सिलसिले में आया था। मेरी उससे उस समय कोई जान पहचान नहीं थी। एक दिन एक लड़का मुझे मेरी माँ के बारे में छेड़ रहा था और मैंने उसे पलट कर गाली दे दी तो वो मुझे मारने लगा और कहने लगा कि साले तेरी माँ है ही रंडी इसलिए में तेरी माँ के बारे में गंदी बातें बोलता हूँ और मुझे मारने लगा।

फिर अचानक से वो आदमी जिसका नाम रिषभ था.. वो आया उसने उस लड़के को पहले रोका और बोला कि ये बच्चा है इसे क्यों मार रहे हो.. लेकिन जब उसने मुझे फिर से मारा तो रिषभ ने उस लड़के को मारा और वहाँ से भगा दिया और मुझे लेकर वो घर आ गया। वो पहले मुझे अपने घर ले गया और उसने मुझे बोला कि पहले अपना चहरा साफ कर लो फिर घर चले जाना और फिर मैंने ऐसा ही किया और में घर पर चला गया। वो मुझे बहुत अच्छा लगने लगा। मैंने अभी तक माँ को ये बात नहीं बताई थी। फिर में अगले दिन उसके पास गया और मैंने उसे थेंक्स बोला और फिर धीरे धीरे हमारी बहुत अच्छी दोस्ती हो गयी। फिर हम रोज़ मिलते थे और बातें करते थे एक दिन में और वो छत पर खड़े होकर बातें कर रहे थे कि नीचे मुझे मेरी माँ नज़र आई.. मैंने उसे दिखाया और कहा कि ये मेरी माँ है। मैंने देखा कि वो घूर घूर कर मेरी माँ के तरफ देख रहा था।

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फिर में लगातार उसके घर आने जाने लगा तो वो मुझसे मेरी माँ के बारे में पूछता था.. जैसे क्या कर रही है? क्या पहना है? यही सब। एक दिन में उससे बातें कर रहा था तो उसने मुझसे पूछा कि अच्छा वो लड़के तुझे क्या बोलते थे? तभी मैंने सारी बातें उसे बताई.. फिर मैंने उससे पूछा कि चूत का मतलब क्या होता है? तभी वो हंसने लगा और बोला कि क्या तुझे नहीं पता? मैंने कहा कि नहीं पता है इसलिए ही तो पूछ रहा हूँ। तभी उसने कहा कि जिससे तू निकला है। फिर मैंने कहा कि क्या मतलब? तभी उसने कहा कि जहाँ से तेरी माँ सू सू करती है वही चूत है। फिर एक दिन उसने मुझसे कहा कि विक्रम क्या तू मुझे अपने घर नहीं बुलाएगा? मैंने कहा कि क्यों नहीं ज़रूर बुलाऊंगा.. अभी चलो.. माँ, पापा भी घर पर है और तुम मिल लेना मेरे माँ-पापा से। उसने कहा कि नहीं जब तेरी माँ घर पर नहीं हो तब बुलाना। मैंने कहा कि ठीक है। में उस समय समझ नहीं पा रहा था कि उसके मन में क्या चल रहा है अगले दिन मेरी माँ मंदिर गयी थी और मैंने उसे कॉल किया और बोला कि आ जावो। फिर वो मेरे घर पर आया हम बैठ कर बातें करने लगे उसने मुझसे पूछा कि विक्रम में तुम्हे कैसा लगता हूँ? मैंने कहा कि आप बहुत अच्छे है।

फिर उसने मुझसे कहा कि विक्रम क्या तुम चाहते हो कि आज से वो लड़के तुम्हे नहीं चिड़ायें? मैंने कहा कि हाँ.. क्या ये हो सकता है? तभी उसने कहा कि हाँ.. क्यों नहीं हो सकता है? लेकिन तू मेरी कुछ बातें मान ले तभी ऐसा हो सकता है। फिर मैंने कहा कि हाँ बोलिए में आपकी हर बात मानूँगा। उसने कहा कि विक्रम तू मुझे दिखा ना तेरी माँ कैसी पेंटी पहनती है। मुझे कुछ समझ में नहीं आया मैंने कहा क्यों आप ऐसा क्यों पूछ रहे हो? उन्होंने मुझसे कहा कि तू नहीं समझेगा तू अभी बच्चा है.. तू जाकर ले आ और हाँ अपनी माँ से कुछ मत कहना.. नहीं तो में तेरी मदद नहीं कर पाउँगा। मैंने कहा कि ठीक है और में गया और माँ जितनी पेंटी और ब्रा पहनती थी वो सब ले आया। उसमे से एक पेंटी ब्रा भीगी हुई थी जो आज ही माँ ने धोया था। मैंने देखा कि उसने वो पेंटी उठाई और उसे सूंघने लगा। मैंने उससे पूछा कि आप ये क्या कर रहे हो? तभी उसने कहा कि कुछ नहीं.. तुम गेम खेलो मैंने कहा कि ठीक है और में गेम खेलने लगा ऐसा कुछ दिन तक चलता रहा।

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में भी चुपचाप सब देखता था और वो मेरी माँ की पेंटी लगभग रोज़ सूंघता था। फिर एक दिन जब माँ घर पर नहीं थी वो मेरे घर आया और हर दिन की तरह मेरी माँ की पेंटी को सूंघ रहा था। तभी थोड़ी देर बाद उसने मुझसे पूछा कि विक्रम क्या मुझे अपनी माँ से नहीं मिलवाओगे? तभी मैंने कहा कि क्यों नहीं.. अपने ही मुझसे कहा था कि आप घर पर तब आओगे जब माँ नहीं रहेगी। फिर उसने कहा कि ठीक है अब में कहता हूँ कि तुम अपनी माँ से मेरा परिचय करवा दो। मैंने कहा कि ठीक है। फिर उस दिन जब माँ घर आई तो मैंने माँ से रिषभ का परिचय करवाया फिर हम लोग बैठ कर बातें करने लगे। थोड़ी देर बाद माँ ने कहा कि में चाय बनाती हूँ और माँ उठकर जाने लगी और वो मेरी माँ को घूरकर देख रहा था। माँ ने सफेद सलवार सूट पहन रखा था और माँ की काली कलर की ब्रा दिख रही थी और साईड से उनकी सलवार के अंदर से काली पेंटी भी दिख रही थी।

फिर माँ ने चाय लाकर हमारे सामने रखी। हम लोगों ने चाय पी और मैंने माँ से कहा कि में गेम खेलने जा रहा हूँ और में दूसरे रूम में जाकर गेम खेलने लगा और माँ और रिषभ बैठकर बातें करने लगे। कुछ देर बाद मुझे माँ की ज़ोर से हंसने की आवाज़ आई और इस तरह माँ की उससे दोस्ती हो गयी। दो महीने इसी तरह चलता रहा और फिर एक दिन पापा ऑफीस से आए उन्होंने माँ से कहा कि में 15 दिन के लिए चेन्नई जा रहा हूँ मेरी एक जरूरी मीटिंग है और वो वहाँ पर दीदी से भी मिल लेंगे। माँ ने कहा कि ठीक है उन्होंने माँ से और मुझसे कहा कि तुम लोग भी चलो। माँ तो तैयार हो गयी लेकिन मैंने माँ से कहा कि मेरा स्कूल है.. में नहीं जा सकता हूँ और मैंने माँ से कहा कि में अंकल के यहाँ पर रह लूँगा.. आप लोग जाओ। लेकिन माँ को मुझे अकेले छोड़ने में डर लग रहा था और उन्होंने कहा कि आप जाईये.. में विक्रम के साथ रहूंगी। शायद वो मेरी जिंदगी की सबसे बड़ी ग़लती हो गयी थी। फिर पापा अगले दिन चेन्नई चले गये और अंकल का धीरे धीरे मेरे घर आना जाना बढ़ गया और वो मुझसे अब कम बातें करने लगे और मेरी माँ से ज्यादा।

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मेरे स्कूल जाने के बाद भी वो मेरी माँ से मिलने मेरे घर आने लगे और मुझे अपनी माँ में भी बहुत से बदलाव दिखने लगे.. पहले वो किसी और आदमी से बातें नहीं करती थी लेकिन अब वो उनके साथ घुल मिलकर बातें करने लगी.. लेकिन में इन सब बातों को अपने दिमाग से निकालता रहा.. क्योंकि मुझे ये नहीं पता था कि उसके मन में क्या है। फिर एक दिन में नीचे से कुछ सामान खरीद रहा था कि वही लड़के जो मुझे परेशान किया करते थे.. उन्होंने मुझसे कहा कि यार हममे क्या कमी थी जो तेरी माँ रिषभ का बिस्तर गरम करने लगी है। फिर उन्होंने कहा कि चल तू एक काम कर.. अपनी माँ से कह कि जैसे उसका बिस्तर गरम करती है हमारा भी कर दे और बोलना हम उसे पैसे भी देंगे और मुझे बहुत गुस्सा आया। मैंने कहा कि तुम लोग झूठ बोल रहे हो.. मेरी माँ ऐसी नहीं है उन्होंने कहा कि अच्छा ठीक है तू जाकर पूछ ले रिषभ से। तभी में वहाँ से चला आया और फिर एक दिन में उससे बातें कर रहा था तो मैंने उनसे कहा कि वो लड़के ऐसा बोल रहे थे।

वो मेरी तरफ देखने लगा और उसने कहा कि ये बिल्कुल सच है मैंने उससे कहा कि आप झूठ बोल रहे हो। तभी उसने कहा कि नहीं में बिल्कुल सच कह रहा हूँ मैंने कहा कि ठीक है में जब तक विश्वास नहीं करूँगा.. जब तक में खुद ना देख लूँ। तभी उसने कहा कि ठीक है आज में फिर तेरी माँ को चोदूंगा और तू देख लेना। मैंने कहा कि ठीक है। फिर उसने मेरे सामने ही मेरी माँ को कॉल किया और पूछा कि भाभी कहाँ पर हो? माँ ने कहा कि में घर पर हूँ.. फिर उसने कहा कि आओ ना मेरे घर पर.. मेरा बहुत मन कर रहा है। माँ ने कहा कि विक्रम नहीं है वो बाहर गया हुआ है कभी भी आ सकता है। उसने कहा कि वो अभी कहाँ आएगा.. वो बाहर गया होगा खेलने.. उसे थोड़ा टाईम लगेगा आ जाओ जल्दी से।

माँ ने कहा कि ठीक है में आती हूँ। मुझे विश्वास नहीं हुआ उनकी बातें सुनकर कि मेरी माँ किसी और के साथ भी सेक्स कर सकती है। उसने मुझे माँ की नंगी फोटो भी दिखाई और पूछा कि अब तो तुझे विश्वास हुआ ना कि तेरी माँ मेरे सामने अपनी टाँगे फैला चुकी है। तभी डोर बेल बजी.. उसने मुझे कहा कि तू दूसरे रूम में छुप जा। मैंने कहा कि ठीक है और में दूसरे रूम में चला गया.. मुझे बार बार यही मन में आ रहा था कि मेरी वजह से मेरी माँ चुद रही है। तभी माँ आई और मैंने देखा कि माँ ने एक लाल रंग का सलवार सूट पहन रखा है। माँ और रिषभ सोफे पर बैठकर बातें कर रहे थे। रिषभ का हाथ मेरी माँ की जांघो पर था और उन्हें सहला रहा था.. उसने मेरी माँ से कहा कि भाभी सच में तुम बहुत हॉट हो जब भी तुम्हे देखता हूँ मेरा मन करता है कि चोद दूँ।

तभी माँ शरमा रही थी और अपने बालों को बार बार ठीक कर रही थी। तभी थोड़ी देर बात करने के बाद माँ ने उससे कहा कि मुझे सू सू आई है और माँ बाथरूम में चली गयी और वो वहीं पर बैठा हुआ था। फिर माँ आई उसने कहा कि चलो रूम में चलते है। माँ ने कहा कि ठीक है और दोनों उठकर जाने लगे और अंकल का एक हाथ मेरी माँ के चूतड़ पर था। वहाँ पर जाकर वो दोनों लेट गये और वो मेरी माँ को किस करने लगे और मुझे बड़ा अजीब लग रहा था कि कोई और आदमी मेरी माँ को किस कर रहा है। तभी उसने माँ से कहा कि भाभी तेरा जिस्म बहुत गरम है लगता नहीं की तुम्हारी उम्र 39 की है.. ऐसा लगता है की तुम 26 की हो। अब वो मेरी माँ को किस करने लगा और मेरी माँ के बूब्स को दबाने लगा।

माँ ने अपने घुटनों को फोल्ड कर लिया था और उनकी टाँगे फैली हुई थी। तभी मैंने गौर से देखा कि माँ की सलवार उनकी चूत के पास से गीली है और वो मेरी माँ की चूत को उनकी सलवार के ऊपर से सहला रहा है और माँ आआआआअ कर रही है। फिर रिषभ ने अपने कपड़े उतार लिए और मुझे उसका लंड दिख रहा था.. बिल्कुल काला और मोटा था और मुरझाया हुआ था। तभी माँ ने उसे अपने हाथ में ले लिया और सहलाने लगी माँ की चूड़ियों की आवाज़ मेरे कानो में आ रही थी। मुझे बहुत अजीब सा लग रहा था और फिर थोड़ी देर तक माँ ने उसका लंड ऊपर से नीचे तक सहलाया और कुछ देर बाद उसका लंड खड़ा हो गया। वो बहुत ही बड़ा था। वो माँ के बूब्स को धीरे धीरे मसल रहा था.. अब वो आराम से बैठ गया और माँ ने उसका लंड अपने मुहं में ले लिया और उसे चूसने लगी.. वो बार बार आआआआअ कर रहा था। फिर उसने मेरी माँ का कुर्ता निकाल दिया।

तभी मैंने देखा कि माँ ने सफेद कलर की ब्रा पहन रखी थी जिसमे लाल फूलल प्रिंट थे। फिर उसने मेरी माँ को अपने सीने से चिपका लिया और चूमने लगा। माँ उसकी जांघो पर बैठी हुई थी और वो मेरी माँ को जकड़ कर मेरी माँ के बूब्स ब्रा के ऊपर से चूम रहा था और कभी उनके होंठो को किस करता। फिर उसने मेरी माँ की ब्रा निकाल दी और बेड पर रख दी। अब माँ ऊपर से नंगी थी और माँ के नंगे बूब्स उसकी छाती से चिपके हुए थे। तभी थोड़ी देर बाद उसने मेरी माँ को लेटा दिया और मेरी माँ की सलवार को निकाल दिया। माँ ने जो पेंटी पहन रखी थी वो बहुत छोटी सी थी। उसने मेरी माँ के टॅंगो को फैला दिया और माँ की चूत के पास अपना मुहं ले गया। माँ की पेंटी थोड़ी गीली थी। तभी उसने पेंटी को सूंघा और बोला कि भाभी बिल्कुल नमकीन खुश्बू आ रही है माँ सिर्फ़ मुस्कुरा रही थी.. उसने पेंटी को थोड़ा चाटा।

फिर उसने माँ की पेंटी को साईड में कर दिया और माँ की चूत को देखने लगा और चूत पर थोड़े थोड़े झांट के बाल थे। उसने अपनी दो उंगलीयों से माँ की चूत को फैला दिया। मुझे बिल्कुल लाल चूत दिखने लगी और माँ सिसकियां लेने लगी। फिर उसने अपनी जीभ चूत पर लगाई और चाटने लगा। माँ आआहह करने लगी और अपने सर को इधर उधर करने लगी। माँ ने अपने हाथ पीछे की तरफ कर रखे थे। जिससे माँ के बूब्स और तन गये थे। मुझे अपनी ग़लती पर शरम आ रही थी कि आज मेरी ग़लतियों के कारण मेरी माँ इसके सामने टाँगे फैलाए हुये है। अब उसने मेरी माँ की पेंटी निकाल दी और फिर से माँ की नंगी चूत को चाटने लगा। अब वो माँ के ऊपर लेट गया और माँ के होंठो को चूमने लगा और अपने एक हाथ से अपना लंड मेरी माँ की चूत पर रख दिया और धक्का दिया और मेरी माँ की चूत में अपना लंड घुसा दिया और धीरे धीरे चोदने लगा।

उसका पूरा लंड मेरी माँ की चूत के अंदर बाहर हो रहा था और माँ औहह इउईई ओफफफफ्फ़ कर रही थी और वो धीरे धीरे अपनी स्पीड बड़ा कर मेरी माँ को चोद रहा था। माँ दर्द से सिसकियाँ ले रही थी.. वो माँ को चोदते हुए कह रहा था कि भाभी तू बहुत गरम है सारे गांव के लड़के तुझे अपने बिस्तर पर ले जाना चाहते है। तभी माँ ने कहा कि मुझे पता है फिर उसने कहा कि भाभी लेकिन में नहीं चाहता कि तू किसी और का बिस्तर गरम करे.. सिर्फ़ मुझसे चिपक कर रहो तो माँ ने कहा कि हाँ। तभी उसने एक ज़ोर का झटका दिया और ज़ोर से मेरी माँ को चोदने लगा। माँ भी चूतड़ उठा उठाकर उसका साथ देने लगी। दोनों पसीने से लथ पत हो गये थे.. फिर भी वो जोर जोर से चोदे जा रहा था। फिर उसने एक ज़ोर का झटका दिया और मेरी माँ के ऊपर लेट गया। उसने अपना वीर्य मेरी माँ की चूत में ही डाल दिया और थोड़ी देर तक वो ऐसे ही माँ के ऊपर लेटा रहा।

फिर थोड़ी देर बाद उसने अपना लंड बाहर निकाल लिया और फिर 20 मिनट तक दोनों नंगे पड़े रहे और वो मेरी माँ के बूब्स को चूसता रहा। फिर माँ ने कहा कि अब में घर पर जा रही हूँ और वो खड़ी होकर जाने लगी और वो नंगा ही था। में जल्दी से दूसरे रूम में चला गया कि कहीं माँ ना देख ले। कुछ देर तक में बहुत चकित रहा ये सब देखकर और में माँ के जाने का इंतज़ार कर रहा था.. लेकिन वो आई नहीं और में फिर से देखने गया तो देखा कि माँ खड़ी है और रिषभ बेड पर बैठा हुआ है और माँ की पीठ उसकी साईड में है और उसने माँ की कुरती उठा दी और वो माँ की गांड के आस पास सूंघ रहा था। फिर उसने अपना एक हाथ आगे की तरफ कर दिया और माँ को कसकर पकड़ लिया और माँ की गांड के छेद में नाक डाल दी और सूंघने लगा।

तभी माँ बार बार अपना हाथ पीछे करके उसे हटाने लगी.. लेकिन वो लगातार सूंघता रहा। फिर उसने माँ की सलवार उनकी जांघ तक कर दी माँ की पेंटी उनकी गांड में घुसी हुई थी और वो फिर से नाक डाल कर सूंघने लगा और उसने जीभ से चाट चाट कर माँ की पेंटी गीली कर दी।तभी उसने माँ की पेंटी को नीचे सरका दिया और माँ की गांड के छेद में अपनी जीभ डाल कर चाटने लगा। माँ आआआआ उईई माँ कर रही थी और अपनी गांड चटवा रही थी और माँ को बहुत मज़ा आ रहा था। मैंने आज तक मेरी माँ को इस हालत में नहीं देखा था। मेरी आँखों के सामने एक आदमी मेरी माँ की गांड चाट रहा था। फिर वो मेरी माँ के पीछे आ गया और माँ झुक गयी माँ की सलवार उनके पैरो तक गिर गयी थी और उसने मेरी माँ की पेंटी को जांघो तक सरका दिया और पीछे से अपना लंड मेरी माँ की गांड में डाल दिया और माँ की गांड मारने लगा।

तभी माँ आआआहह सस्स्सस्स औहह धीरे धीरे कर रही थी। माँ की सिसकियाँ मेरे कानो में अच्छे से सुनाई दे रही थी और वो मेरी माँ के चूतड़ सहलाता हुआ मेरी माँ की गांड मार रहा था। तभी थोड़ी देर बाद वो ज़ोर से मेरी माँ की गांड मारने लगा। माँ दर्द से चिल्ला रही थी और मुझसे माँ की ये हालत देखी नहीं जा रही थी.. लेकिन में क्या करता। तभी थोड़ी देर बाद उसने माँ के दोनों बूब्स को पकड़ कर जोर जोर से धक्के देने शुरू कर दिये और उसने अपनी स्पीड बड़ा दी। फिर कुछ और धक्के देने के बाद उसने अपना वीर्य माँ की गांड के छेद में गिरा दिया और फिर माँ ने अपनी सलवार ऊपर चड़ा ली। तभी में वापस दूसरे रूम में चला गया और फिर कुछ देर बाद माँ बाहर बाहर आ गयी और वो भी साथ में था। में चुपके से थोड़ा बाहर आ कर देखने लगा।

तभी वो माँ को किस कर रहा था और कह रहा था कि भाभी आपके पति चेन्नई गये है क्या आप इतने दिन रात भर मेरे साथ नहीं रह सकती है? तभी माँ ने कहा कि में देखूंगी.. लेकिन अगर मुझे मौका मिला तो पक्का आऊंगी और फिर वो चली गयी। फिर वो आया और मुझसे बातें करने लगा। उसने मुझसे पूछा कि देखा तूने.. मैंने कहा कि हाँ। फिर उसने मुझसे कहा कि देख तेरी माँ जवान है और उनको इन सब चीज़ो की ज़रूरत है और में तेरी माँ की मदद कर रहा हूँ.. उसने कहा कि तुम ये बातें किसी से मत कहना। फिर मैंने उससे कहा कि ठीक है और मैंने किसी को ये बात नहीं बताई। इस बात को दो साल हो गये है वो आज भी मेरी माँ को चोदता है। अब उसकी हिम्मत और बड़ गई है.. वो तो आजकल मौके की तलाश में रहता है और जब भी मौका मिला चुदाई शुरू। उसने कई बार मेरे घर पर भी आकर मेरी माँ को चोदा है और मैंने कई बार देखा है ।।

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