चुत चोद चोद कर लण्ड और चुत दोनों सूज गए

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हेलो दोस्तों, मैं तमन्ना. आज में आपको एक दिलचस्प और रोमांटिक से भरी मेरी कामुक और वासना से भरी एक सेक्सी स्टोरी के साथ. दोस्तों ठंडी का टाइम था. में आगे बढ़ने से पहले आपको बता दू की में एक सेक्सी लड़की हूँ मेरा फिगर 34-30-36 है और मेरा एक बॉयफ्रेंड है जिसका नाम मुकेश है और में उससे बहुत प्यार करती हूँ। और में उसके लिए में अपनी जान भी दे सकती हूँ। पर क्या करू दोस्तों मेरी चुत पर मेरा कंट्रोल नहीं रहता है में कभी अपने बॉयफ्रेंड को धोका नहीं देना चाहती लेकिन सेक्स की वासना मुझ पर हावी हो जाती है। और मुझे सेक्स के आलावा कुछ नहीं नज़र नहीं आता जब मेरा सेक्स करने का मन करता है

तो में किसी भी लड़के से साथ सेक्स करवा सकती हूँ। जब मुझे सेक्स करने का मन करता है तो में ये दुनिया भूल के सेक्स की वासना के मज़े लेती रहती हूँ। लेकिन जब में सेक्स कर के घर आती हु तो मेरी ये हिम्मत नहीं होती की में अपने बॉयफ्रेंड को ये बता पाऊ की आज में कहा मुँह काला कर के आई हूँ। पर बिना बताये मुझे नींद नहीं आती है। दोस्तों ये बात 2015 की सर्दियों की एक नाईट की है जब में अपनी बेस्ट फ्रेंड राधा के वह रत रहने के लिए गई थी। में और मेरी दोस्त राधा स्कूल टाइम से दोस्त है हम लोग कभी कभी एक दूसरे के घर पर रहा करते है और खूब बाते और मस्ती करते है। हुआ यु की मेरे मम्मी पापा आउट ऑफ़ सिटी जा रहे थे तो मुझे राधा के घर पर छोड़ के गए थे।

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राधा का हाउस बहुत बड़ा था और राधा के घर में बस एक ओल्ड दादी रहती थी. राधा और राधा का बड़ा भाई रहा करता था. राधा का बड़ा भाई नरेश, बहुत जय्दा ही हॉट और सेक्सी लड़का था. लम्बा चौड़ा, गबरू जवान  लड़का. बिलकुल बिंदास और बेपरवाह… दुनिया से उसे कोई मतलब ही नहीं था और खुदकी मस्ती में जीता था वो. उसकी ये आदत, मुझे बहुत ज्यादा पसंद थी. उस रात जब मैं राधा के घर रुकी थी. तब दादी राधा की बुआ जी के घर गयी हुई थी. और अब बस राधा का बड़ा भाई नरेश ही घर पर था. मैं राधा से मिली. थोड़ी ही देर में, हम नरेश के कमरे में बैठे रहे और गप्पे लगाते रहे. फिर, अचानक राधा को पास में रहने वाली आंटी ने किसी काम के लिए बुला लिया और राधा वहां चली गयी. पीछे से राधा  नरेश भैया को मेरा ख्याल रखने के लिए कहकर आंटीके घर चली गयी. राधा के जाते ही, नरेश कमरे में आया और बोला – राधा  तुम्हारा ख्याल रखने के लिए कहकर गयी है.

नरेश के चेहरे पर थोड़ी  सी शरारती मुस्कान थी, जैसे कि मानो दिमाग में देसी सेक्स की तस्वीर चल रही हो. अब मैं समझ रही थी, कि उसके दिल, दिमाग और लंड में क्या चल रहा है? देसी वासना… मैंने भी मुस्कराकर कहा – हा जी  मुझे तो  पहले से ही पता था, कि नरेश मुझे बहुत लाइक करता था और मैं भी उसे लाइक करती थी. नरेश दिखने में बहुत ही सेक्सी था और मुझे पूरी उम्मीद थी, कि नरेश का लंड भी नरेश के जितना ही गरम और सेक्सी होगा. देसी सेक्स में,नरेश कमाल का होगा. नरेश मेरे पास आके बैठा और मुझे प्यार से हाथ लगाने लगा. मेरे कंधे और हाथ पर अपनी उंगलिया घुमाने लगा. नरेश की कामुक भरी आखे सब साफ़ – साफ़ कहा रही थी. मुझे भी अब  मज़ा आ रहा था और मैं मना नहीं कर रही थी.

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थोड़ी ही देर में राधा आ गयी और हमारा कनेक्शन टूट गया. पर वो मुझे धीरे से कान में कहकर गया की – जो अधुरा छोड़कर जा हा हूँ, उसे पूरा जरुर करेंगे बहुत ही जल्दी. और फिर मेरी चुत तो उसे चुदवाने के तड़प रही थी. फिर नरेश दो दिन तक मौका ही ढूंढता रहा, कुछ शैतानिया भी की उसने, पर राधा के घर पर होने की वजह से हम सेक्स नहीं कर पाए. बस आँखों ही आँखों में अपनी ठरक और देसी सेक्स की चाह एक दुसरे को जताते रहे. आहे भरते रहते थे और अपने होठो को काटते रहते थे. एक दुसरो को चूमने की चाह में. फिर तीसरे दिन, हमें बहुत अच्छा मौका मिला. राधा के कॉलेज में परीक्षा थे और वो पूरा दिन कॉलेज में प्रेजेंटेशन और परीक्षा देने में बिताने वाली थी. नरेश ने कहा, खुदसे आगे बड़कर.. कि नरेश मेरा ध्यान रख लेंगे, अच्छे से. और राधा को फिकर करने के कोई जरूरत नहीं है.

फिर जैसे ही राधा कॉलेज गयी – वैसे ही नरेश ने मुझे अपने कमरे में ले गया और बोला – आओ तम्मना, तुम्हारा बहुत अच्छे से ख्याल रखने वाला हु आज में. ये कहकर वो मेरे पिंक  लिप्स को किस्स करने लगा. मेरे बूब्स को अपनी छाती से रगड़ने लगे. नरेश की छाती पर मेरी नरम चुचिया रगड़ खा रही थी और मैं मग्न होके मेरी चूत को अपनी ऊँगली से सहलाने लगी थी. मैंने जैसे ही अपनी ऊँगली अपनी चूत पर रखी, तो पाया कि मेरी चूत पहले से ही गीली हो चुकी थी और मैं चुदाई के लिए बेसब्री से तैयार थी. मैं पीछे होकर बिस्तर पर लेट गयी थी और नरेश मेरे ऊपर आगया. नरेश अपनी छाती से मेरे रस भरे बूब्स को दबाने लगा. नरेश ने अपने लंड को मेरी चूतड़ पर रखा और उसपर जोर जोर से रगड़ने लगा. नरेश का लण्ड एकदम सख्त होने के बाद, नरेश ने मेरी चूतड़ में अपना लंड डालने की कोशिश की.

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पर वो बहुत ही बड़ा था और मुझे  दर्द करने लगा था. मेरी चीख निकलने लगी. नरेश ने अपने हाथ से मेरा मुह दबाया और अपना लंड बाहर निकाल कर दुबारा मेरी चुत के अन्दर डाला. इस बार, इतनी गहराई तक गया, नरेश का मोटा और लम्बा लंड; कि मुझे मज़ा ही आ गया. मुझे दर्द तो हो रहा था, लेकिन मैं मस्ती के मारे चीख रही थी. वो अपना लंड अन्दर बाहर करता रहा उस टाइम मेरी टंगे नरेश के कंधे पे थी  और इसी पोजीशन में चुदाई करता रहा. फिर नरेश ने पोजीशन बदल कर मुझे कुत्ते वाली स्टाइल में बैक से चोदा और मेरे बड़े बड़े बूब्स को पीछे से दबाता रहा. नरेश अपना लंड जोर से अन्दर – बाहर कर रहा था. उनके लण्ड के सुपाडे मुझे मेरी गांड पर लगते हुए मुझे महसूस हो रहे थे,

जब तक नरेश ने मुझे कुत्ते वाली पोजीशन में चोदा. मैं मज़ा लेती रही और नरेश अपने लंड को मेरी चूतड़ में बहुत तेजी से अन्दर बाहर कर रहे थे. मुझे मज़ा आ रहा था और मेरी चूत तो पानी से लतपत हो रखी थी. क्योंकि, ऐसे डेंजर सेक्स से पता नहीं, मैं कितनी बार झड चुकी थी उस दिन.जब तक राधा घर वापस नहीं आ गयी. पूरा दिन, हम दोनों थोड़ी – थोड़ी देर के बाद में, चुदाई करते रहे और वो मेरी चुत को अपना लंड चखाते रहा मेरी चुत तो पूरी तरह लाल होकर सूज कई थी और नरेश के लण्ड का टोपा भी आगे से पूरी तरह लाल होकर सूज गया था , उसके बाद अगले 3 दिन तक पूरा दिन सिलसिला चलता रहा और बेचारी राधा को अंदाज़ा भी नहीं था, कि उसकी पीठ के पीछे ये सब हो रहा है!

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