चलती गाडी में दबाई चूचियाँ

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चलती गाडी में दबाई चूचियाँहेलो दोस्तो, मैं आपको अपनी एक सच्ची घटना बताने जा रहा हूँ, जब मैंने पहली बार किसी कुँवारी लडकी की चूत मारी थी!! इससे पहले मैं दो बार नागपुर के गंगा जमुना में जाकर मार चुका हूँ पर आप तो जानते ही होंगे कि वहाँ पर वो मजा कहाँ, जो सील पैक में आता है। खैर, मैं 19 साल का हूँ, रंग गोरा और स्मार्ट हूँ। मैं बी. सी. ए. कर रहा हूँ और मेरी कोई गर्ल फ्रैंड नहीं है। एक बार मैं प्रैक्टिकल कर रहा था, कालेज की लैब में बैठ कर… मैंने सर को बुलाया और कुछ पूछा, लेकिन वह नहीं बता सके, बल्कि गलत ही बता दिया। तो मैंने ही सर को बताया कि सर ऐसा नहीं ऐसा होता है।

मुझे पता भी नहीं चला कि एक लड़की जिसका नाम प्रतीक्षा है, वह मुझे बहुत देर से घूर रही है। जब सर चले गये तो उसने मुझसे कुछ पूछा तो मैंने कहा – मैं प्रयास करके बताता हूँ, थोड़ी देर में!! लेकिन उसने मुझसे जो पूछा वह मुझसे नहीं बना, तो मैंने उसे मना कर दिया। मैंने तो सोच ही लिया था कि अब तो नहीं पटेगी, क्योंकि मैं उसे बता ही नहीं पाया था। फिर वो रोज मुझसे पूछा करती थी – राहुल, बन गया क्या? तो मुझे बहुत बुरा लगता था। 2-3 दिन बाद मैंने सोच लिया था कि कुछ भी हो जाये अब तो मैं इसको बताकर ही रहूँगा।

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मैंने वह पूरा दिन उस चीज में लगा दिया, नेट में सर्च किया। बहुत कोशिश की, आखिर मुझसे बन गया!! मुझे बहुत खुशी हुई। दूसरे दिन मैंने खुद जाकर उसे बताया। वह भी बहुत खुश हुई और मुझसे मेरी कापी मांगने लगी। मैंने भी मना नहीं किया, दे दी मैंने उससे उसका नंबर मांगा और उसने एक बार में दे दिया और मेरा नंबर भी ले लिया तो मैंने सोच लिया कि बात तो बन सकती है। मैं बहुत खुश था। उसी दिन उसका एस एम एस आया – राहुल, तुमने वो प्रोग्राम सर को तो नहीं बताया? तो मैंने उसे काल करके बताया कि सर को मैंने प्रोग्राम नहीं बताया। फिर धीरे-धीरे हमारी बातें बढ़ने लगी, वो मुझसे कालेज में भी बात करती थी और लैब में, मेरे बाजू वाले कम्पयूटर पर बैठने लगी।

एक बार वह मेरे बाजू वाले कम्पयूटर पर बैठी थी, लेकिन उसके साथ उसकी एक सहेली भी बैठी थी और वह दोनों आपस में बात कर रहे थे, मुझे बहुत गुस्सा आ रहा था कि वो मुझसे बात क्यों नहीं कर रही है, तो मैं वहाँ से उठकर उससे बिना कुछ बोलो, चला आया। शाम को उसका फोन आया – राहुल, तुम कितने खराब हो। बाय भी नहीं बोल सकते थे। वो बहुत रो रही थी, मैं समझ गया कि इसका दिल मुझ पर आ गया है। लेकिन अब तक हम दोनों में से किसी ने भी एक दूसरे को आइ लव यू नहीं कहा था।

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जब वह रो रही थी, तो मैंने उससे कहा कि तुम रो क्यूँ रही हो? फिर मैंने उससे एक सवाल किया – तुम मुझे क्या मानती हो? उसने कहा – मैं तुमको अपना दोस्त मानती हूँ। मैंने उससे फिर एक सवाल किया – यदि, मेरी जगह तुम्हारी वो दोस्त होती जो कालेज में तुमसे बात कर रही थी, तब भी तुम रोतीं?? वो बोली – नहीं। मैंने मौका देखकर उसे आय लव यु कह दिया, तो वो मना करने लगी। लेकिन मैं कहाँ मानने वाला था। मैंने भी मनवा ही लिया। दूसरे दिन उसने एक मन्दिर चलने को कहा, मन्दिर करीब 40 कि मी दूर था। हम उसकी एकटिवा में चले गये।

जाते समय गाडी मैंने चलायी, तो कुछ हो ना सका। लेकिन लौटते वक्त गाडी उसने चलाने की ज़िद की। फिर वो एक सुनसान रास्ते से चलने लगी… मैं समझ गया, आज तो मुझे मिलने वाली है।

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पहले वो खुब नाटक कर रही थी, लेकिन मैं कहाँ मानने वाला था। मैंने उसकी खुब चूचियाँ दबाई, वो गरम होने लगी और बोलने लगी – राहुल, धीरे करो ना… प्लीज़।

फिर वो अजीब आवाजे निकालने लगी आ आ आ आ… आ्हण्ण्ण्ई ई ई् ण्ण्ण्इई ईइ ई…

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लग रहा था, गाडी से गिरा ना दे… पर मुझे बहुत मज़ा आ रहा था। फिर वो बोलने लगी – राहुल, कुछ करो ना!! पर अब मैं भी क्या कर सकता था, बीच सड़क पर…

मैंने रास्ते भर उसकी खुब चूचियाँ दबाई। कभी कभी तो चूत में भी हाथ फेर देता था।

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मेरा लण्ड तो ऐसे खडा था, जैसे मानो अभी उसकी चूत फाड देगा!!

ऐसा करते करते हम शहर पहुँच गये, तो फिर मौका ही नहीं मिल पा रहा था।

रास्ते मे उसके पापा का फोन आया। उससे कहा – हमें टाइम लग सकता है!!

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